ओपीडी का गिर गया ग्राफ
तीन नवंबर को मारपीट के बाद चार नवंबर की सुबह छह बजे से हड़ताल शुरू हुई। पहले दिन से ही ओपीडी का ग्राफ लगातार गिरता चला जा रहा था। इसके अलावा ऑपरेशन और भर्ती मरीजों में भी कमी आई है।
ओपीडी की संख्या
तारीख पर्चा बिक्री पंजीकरण
04 नवंबर 3329 3410
05 नवंबर 2846 3691
06 नवंबर 2343 2965
07 नवंबर 1979 2674
08 नवंबर 1904 2420
(नौ और दस नवंबर को अवकाश की वजह से ओपीडी बंद रही)
इमरजेंसी में छाया रहा सन्नाटा
तीन नवंबर को दो जूनियर डॉक्टरों की पिटाई के बाद चार नवंबर सुबह छह बजे से ही रेजिडेंट हड़ताल पर थे। पहले ओपीडी, ऑपरेशन थियेटर और वार्डों में मरीजों को न देखने का निर्णय लिया था, बाद में छठे दिन (नौ नवंबर) से इमरजेंसी और आईसीयू से भी रेजिडेंटों ने अपने को अलग कर लिया।
रविवार को भी रेजिडेंट इमरजेंसी और आईसीयू, एसीयू में मरीजों को देखने नहीं पहुंचे। हालत यह रही कि अस्पताल के साथ ही ट्रामा सेंटर की इमरजेंसी पर सन्नाटा छाया रहा। यहां तक कि कई मरीजों को बिना इलाज लौटना पड़ा।
रेजिडेंटों ने चिकित्सा अधीक्षक को भेजा था पत्र
हड़ताल कर रहे रेजिडेंटों ने एक बार फिर रविवार को चिकित्सा अधीक्षक को पत्र भेजकर अपनी मांग रखी है। दस नवंबर को ईमेल के माध्यम से भेजे अपने पत्र में घटना में पांचों आरोपियों की गिरफ्तारी, घटना वाले दिन की सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने, अस्पताल प्रशासन द्वारा मामले में मुकदमा लड़ने के लिए एक अधिवक्ता रखने, उच्च क्षमता वाले सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने, केंद्रीय प्रसार माध्यम, जांच कमेटी में आईएमएस के सदस्य को रखे जाने की मांग रखी है। रेजिडेंटों का कहना है कि मांगें पूरी न होने तक हड़ताल समाप्त नहीं होगी।
अस्पताल में दलालों ने की धक्का मुक्की
बीएचयू सर सुंदरलाल अस्पताल में रेजिडेंटों की हड़ताल की वजह से दलालों की चांदी हो गई। रविवार को इमरजेंसी के बाहर दलालों की सक्रियता अधिक रही। इस दौरान इमरजेंसी के बाहर मरीजों की समस्याओं को लेकर फोटो खींच रहे फोटो जर्नलिस्टों से दलालों ने धक्का-मुक्की की। पहले तो उन्होंने इमरजेंसी से बाहर जाने को कहा बाद में विरोध करने पर मारपीट पर उतारू हो गए।
रेजिडेंटों की सभी मांगें मान ली गई हैं। इसमें वार्डों में सीसी कैमरे लगाने, सुरक्षा बढ़ाने, दोषियों की गिरफ्तारी सहित अन्य मांगों पर जल्द कार्रवाई की जाएगी। - प्रो. आरके जैन, डायरेक्टर, आईएमएस बीएचयू