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बीएचयू: हड़ताल खत्म कराने में छूटा अस्पताल प्रशासन का पसीना, एक सप्ताह बाद काम पर लौटे धरती के भगवान

Mon, 11 Nov 2019 11:42 AM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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बीएचयू अस्पताल में डॉक्टरों के हड़ताल पर होने से परेशान मरीज। - फोटो : अमर उजाला
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बीएचयू सर सुंदरलाल अस्पताल और ट्रामा सेंटर में रेजिडेंटों की हड़ताल खत्म कराने में अस्पताल प्रशासन को 140 घंटे लग गए। ऐसा नहीं है कि जो मांगें रेजिडेंट कर रहे थे, उसे पूरा नहीं किया जा सकता है, लेकिन बस कार्रवाई का आश्वासन देने में ही सात दिन का समय लग गया। अस्पताल प्रशासन और रेजिडेंटों के बीच चली रार में सबसे ज्यादा नुकसान मरीजों को हुआ। दूर दराज से बेहतर इलाज के लिए आए सैकड़ों मरीजों को बिना इलाज लौटना पड़ा। अब हड़ताल खत्म होने के बाद मरीजों को राहत मिलेगी।

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अस्पताल परिसर में मारपीट और फिर हड़ताल की यह पहली घटना नहीं थी, इसके पहले भी हड़ताल हो चुकी है। पिछले साल सितंबर में मारपीट के बाद भी रेजिडेंटों ने हड़ताल की थी तब भी सुरक्षा का आश्वासन मिला था, लेकिन साल भर बाद भी स्थिति जस की तस थी। तब भी अस्पताल प्रशासन ने सुरक्षा बढ़ाए जाने, कैमरे लगाए जाने, मरीजों के परिजनों के लिए पास जारी करने का फैसला लिया था, लेकिन उस पर अमल नहीं हो पाया।

 रेजिडेंट डाक्टर के हड़ताल पर होने से अस्पताल में खाली पड़े थे बेड

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इस बार भी घटना के बाद रेजिडेंटों ने सुरक्षा को ही मुख्य मुद्दा बनाया और उसी की मांग करते रहे। कई बार चिकित्सा अधीक्षक, निदेशक ने बैठक कर हड़ताल खत्म करने की अपील की। अब जब शनिवार से इमरजेंसी, आईसीयू में रेजिडेंटों ने अपने को अलग कर दिया और व्यवस्था चरमराने लगी तब आनन-फानन में बीएचयू अस्पताल प्रशासन ने मांगें मानकर हड़ताल खत्म करने की अपील की, जिस पर रेजिडेंट भी मान गए।

ओपीडी का गिर गया ग्राफ
तीन नवंबर को मारपीट के बाद चार नवंबर की सुबह छह बजे से हड़ताल शुरू हुई। पहले दिन से ही ओपीडी का ग्राफ लगातार गिरता चला जा रहा था। इसके अलावा ऑपरेशन और भर्ती मरीजों में भी कमी आई है।

ओपीडी की संख्या
तारीख                पर्चा बिक्री        पंजीकरण
04 नवंबर            3329                3410
05 नवंबर            2846                3691
06 नवंबर            2343                2965
07 नवंबर            1979                2674
08 नवंबर            1904                2420
(नौ और दस नवंबर को अवकाश की वजह से ओपीडी बंद रही)
 

इमरजेंसी में छाया रहा सन्नाटा 
तीन नवंबर को दो जूनियर डॉक्टरों की पिटाई के बाद चार नवंबर सुबह छह बजे से ही रेजिडेंट हड़ताल पर थे। पहले ओपीडी, ऑपरेशन थियेटर और वार्डों में मरीजों को न देखने का निर्णय लिया था, बाद में छठे दिन (नौ नवंबर) से इमरजेंसी और आईसीयू से भी रेजिडेंटों ने अपने को अलग कर लिया।

रविवार को भी रेजिडेंट इमरजेंसी और आईसीयू, एसीयू में मरीजों को देखने नहीं पहुंचे। हालत यह रही कि अस्पताल के साथ ही ट्रामा सेंटर की इमरजेंसी पर सन्नाटा छाया रहा। यहां तक कि कई मरीजों को बिना इलाज लौटना पड़ा।
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रेजिडेंटों ने चिकित्सा अधीक्षक को भेजा था पत्र
हड़ताल कर रहे रेजिडेंटों ने एक बार फिर रविवार को चिकित्सा अधीक्षक को पत्र भेजकर अपनी मांग रखी है। दस नवंबर को ईमेल के माध्यम से भेजे अपने पत्र में घटना में पांचों आरोपियों की गिरफ्तारी, घटना वाले दिन की सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने, अस्पताल प्रशासन द्वारा मामले में मुकदमा लड़ने के लिए एक अधिवक्ता रखने, उच्च क्षमता वाले सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने, केंद्रीय प्रसार माध्यम, जांच कमेटी में आईएमएस के सदस्य को रखे जाने की मांग रखी है। रेजिडेंटों का कहना है कि मांगें पूरी न होने तक हड़ताल समाप्त नहीं होगी।

अस्पताल में दलालों ने की धक्का मुक्की
बीएचयू सर सुंदरलाल अस्पताल में रेजिडेंटों की हड़ताल की वजह से दलालों की चांदी हो गई। रविवार को इमरजेंसी के बाहर दलालों की सक्रियता अधिक रही। इस दौरान इमरजेंसी के बाहर मरीजों की समस्याओं को लेकर फोटो खींच रहे फोटो जर्नलिस्टों से दलालों ने धक्का-मुक्की की। पहले तो उन्होंने इमरजेंसी से बाहर जाने को कहा बाद में विरोध करने पर मारपीट पर उतारू हो गए।
रेजिडेंटों की सभी मांगें मान ली गई हैं। इसमें वार्डों में सीसी कैमरे लगाने, सुरक्षा बढ़ाने, दोषियों की गिरफ्तारी सहित अन्य मांगों पर जल्द कार्रवाई की जाएगी। - प्रो. आरके जैन, डायरेक्टर, आईएमएस बीएचयू
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