मंडलीय अस्पताल में भी नही मिला वेंटिलेटर
बीएचयू अस्पताल से बच्चे को लेकर परिजन मंडलीय अस्पताल गए तो यहां भी इमरजेंसी में डॉक्टरों ने वेंटिलेटर ना होने की बात कही और उसे दूसरे अस्पताल ले जाने को कहा। हालांकि तीसरी लहर को देखते हुए ही कुछ दिन पहले ही पीएम केयर फंड से ही मंडलीय अस्पताल में वेंटिलेटर आए थे और लगांया भी। अब क्यों नहीं बच्चे को वेंटिलेटर मिला यह भी समझ से परे है।
एमएस को मिली जानकारी तो मचा हड़कंप
बीएचयू अस्पताल में बेड खाली होने के बाद भी दस दिन के बच्चे को मंडलीय अस्पताल रेफर करने की जानकारी एमएस प्रो. केके गुप्ता को मिली तो हड़कंप मच गया। वह भी इस बात को सुनकर चौंके और अपने ऑफिस के माध्यम से इसकी हकीकत पता लगवानी शुरू कर दी। एमएस ऑफिस से गंभीर बच्चों के इलाज के लिए जिम्मेदार लोगों को फोन करना शुरू किया गया तो पता चला कि बच्चों के लिए एनआईसीयू में वेंटिलेटर वाले बेड भी खाली हैं।
एनआईसीयू, पीआईसीयू में 60 बेड खाली
बीएचयू अस्पताल में 30 बेड का एनआईसीयू, 10 बेड पीआईसीयू सहित बाल रोग विभाग में कुल 85 बेड पर गंभीर बच्चों के इलाज की व्यवस्था है। एनआईसीयू के इंचार्ज प्रो. अशोक कुमार ने पूछे जाने पर बताया कि इस समय कुल मिलाकर 20 से 25 बच्चे ही भर्ती होंगे जबकि अन्य बेड यानी करीब 60 बेड खाली हैं। इमरजेंसी में तैनात बाल रोग विभाग के रेजीडेंट को पता नहीं होगा, इस वजह से बेड ना होना लिख दिया होगा। उन्होंने बताया कि जानकारी मिलते ही बच्चे को इमरजेंसी में भर्ती कराया गया। उसकी कोरोना जांच भी कराई गई है, रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद स्थिति के अनुसार एनआईसीयू या पीआईसीयू में शिफ्ट किया जाएगा।
अमर उजाला की पहल पर दोबारा बीएचयू में ही शुरू हुआ इलाज
दस दिन के जिस बच्चे को बीएचयू अस्पताल से बेड खाली न होने की बात कहकर वापस कर मंडलीय अस्पताल रेफर किया गया था। अमर उजाला की पहल पर उसी बच्चे को दुबारा बीएचयू में ही भर्ती कर इलाज शुरू कर दिया गया। बीएचयू से रेफर करने की जानकारी अमर उजाला को मिली तो इसको तुरन्त एमएस प्रो. केके गुप्ता को घटना की जानकारी, बीएचयू अस्पताल से बेड खाली ना होने का लिखा पर्चा भेजा गया। इसके बाद एमएस ऑफिस भी सक्रिय हो गया। ऑफिस से पहल शुरू हुई और करीब तीन घंटे बाद दोबारा बीएचयू अस्पताल में परिजनों को बच्चे को लेकर बीएचयू बुलाया गया। अब उसको बेड भी मिल गया और इलाज भी हो रहा है। परिजनों ने भी अमर उजाला को इसके प्रति आभार जताया।
बीएचयू अस्पताल के एमएस प्रो. केके गुप्ता ने बताया कि बीएचयू अस्पताल में बेड होने के बाद भी क्यों बच्चे को मंडलीय अस्पताल रेफर किया गया। इस बारे में जिम्मेदार लोगों से पूछताछ की जाएगी। इस तरह की कार्रवाई ठीक नहीं है।