पर्चा काउंटर से लेकर हृदय रोग विभाग तक गया बेटा
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बीएचयू अस्पताल में शनिवार को जो दिखा वह विश्वविद्यालय प्रशासन के बेहतर प्रबंधन के दावों को आईना दिखाने के लिए काफी है। यहां गाजीपुर निवासी एक बेटा बूढ़ी मां को लेकर डॉक्टर को दिखाने पहुंचा। मां चलने में असमर्थ थी। बहुत प्रयास करने के बाद स्ट्रेचर भी नहीं मिला। लिफ्ट भी खराब थी। लिहाजा बूढ़ी मां को कंधे पर लेकर बेटा भरत एक विभाग से दूसरे विभाग भागता रहा।
इस दौरान अस्पताल में जगह-जगह तैनात सुरक्षाकर्मियों के साथ ही इधर से चिकित्सक, पैरामेडिकल स्टाफ भी आते-जाते रहे, लेकिन किसी की नजर नहीं पड़ी। बीएचयू अस्पताल में पहले भी किसी को बेड नहीं मिलने, किसी को ओपीडी में डॉक्टर को दिखाने के लिए स्ट्रेचर नहीं मिलने तो कभी जमीन पर लिटाकर ऑक्सीजन चढ़ाने का मामला सामने आते रहे हैं। मरीजों और उनके परिजनों की परेशानियों को देखने के बाद भी यहां बेहतर प्रबंधन व सुविधाओं के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की आंखें नहीं खुलती हैं।
गाजीपुर निवासी महिला को थी सांस की परेशानी
गाजीपुर निवासी घूना देवी को सांस लेने में तकलीफ थी। उनको लेकर बेटा भरत हृदय रोग विभाग में प्रो. ओमशंकर को दिखाने अस्पताल पहुंचा। पुरानी इमरजेंसी के पास से स्ट्रेचर लेने गया तो पता चला कि इमरजेंसी शिफ्ट होकर सुपरस्पेशियलिटी में चली गई है।
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