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बीएचयू अस्पताल का हाल, 1560 बेड की सुविधा मगर आईसीयू में सिर्फ इतने

Tue, 03 Jul 2018 02:14 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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बीएचयू अस्पताल
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बीएचयू के चिकित्सा विज्ञान संस्थान में एम्स जैसी सुविधा मिलने की बात चल रही है लेकिन बुनियादी संसाधनों की बात करें तो हालात बेहद चिंताजनक हैं। 1560 बेड के सर सुंदरलाल अस्पताल में तय मानक के अनुसार 150 बेड की इंटेंसिव केयर यूनिट (आईसीयू) होनी चाहिए लेकिन आपको हैरानी होगी कि यहां आईसीयू में मात्र 16 बेड हैं।

हालात ऐसे हैं कि रोजाना औसतन दस मरीजों को सीरियस कंडीशन के बावजूद आईसीयू में बेड मुहैया नहीं हो पाता। ऐसी स्थिति में अक्सर मरीजों की जान पर बन आती है।  आईसीयू में बेड मुहैया न हो पाने से स्टाफ नर्स मंजू को समुचित उपचार नहीं मिल पाया और उसकी मौत हो गई।
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आईसीयू में बेड मुहैया न होने का यह इकलौता मामला नहीं है। कई बार आईसीयू में बेड न मिलने और इसके चलते मरीजों की मौत होने को लेकर पहले भी हंगामा मच चुका है, बावजूद इसके अस्पताल प्रबंधन ने अब तक आईसीयू की क्षमता बढ़ाने की कोई ठोस पहल नहीं की है।

 जबकि, गंभीर हालत वाले मरीजों की जिंदगी के लिए हर एक पल बेहद अहम होता है। आईसीयू में भर्ती कराने के लिए यहां तक कि चिकित्सा अधीक्षक कार्यालय से लेकर संस्थान तक के उच्चाधिकारियों के यहां रोजाना सिफारिशें आती हैं।

अस्पताल प्रशासन के अधिकारी भी स्वीकारते हैं कि आईसीयू की क्षमता कम होने से खासी दिक्कतें हो रही हैं। बीएचयू में वैसे भी पूर्वांचल के विभिन्न जिलों के अलावा आसपास के प्रांतों से रोजाना सैकड़ों मरीज पहुंचते हैं।
मरीजों के जबरदस्त दबाव के बावजूद आईसीयू की क्षमता न बढ़ाया जाना यहां चिकित्सा सुविधाओं के उन्नयन के दावों पर बड़ा सवाल है। 

अस्पताल परिसर में इंतजार करते लोग - फोटो : अमर उजाला
आईसीयू में बेड न मिलने पर मरीजों के सामने दो ही विकल्प होते हैं। या तो घरवाले उन्हें निजी अस्पताल ले जाएं या फिर बेड खाली होने के इंतजार में वे तड़पते रहें। रोजाना ऐसी स्थितियां सामने आती हैं। कभी-कभी तो ऊपर से फोन आने पर आईसीयू में वैकल्पिक तौर पर एक या दो बेड बढ़ाने पड़ जाते हैं।

सोमवार सुबह धरने के दौरान स्टाफ नर्सों का कहना था कि वे इसी अस्पताल में सेवाएं देती हैं लेकिन जब उन्हें ही चिकित्सा सुविधाएं समुचित रूप से नहीं मिल पा रही हैं तो बाकी मरीजों की मुश्किलें समझी जा सकती हैं। 

क्या है एमसीआई का मानक
एमसीआई के मानक के अनुसार किसी भी मेडिकल कॉलेज/ अस्पताल में कुल बेड का 10 प्रतिशत बेड आईसीयू में होना चाहिए। जानकारी के मुताबिक बीएचयू 1560 बेड है, इस हिसाब से करीब 156 बेड होना चाहिए लेकिन महज 16 बेड ही आईसीयू में हैं। 

बीएचयू की स्टाफ नर्सों का दावा

बीएचयू अस्पताल - फोटो : अमर उजाला
बीएचयू की स्टाफ नर्सों ने कहा कि समय से अगर मंजू को आईसीयू में बेड मुहैया हो गया होता तो उसका समुचित इलाज हो जाता और फिर उसकी जान बच सकती थी। लेकिन, वहां जाने पर जब हेल्थ कार्ड दिखाया गया तो उसमें नो बेड लिखकर वापस कर दिया गया। इसी वजह से उसका इलाज नहीं हो सका। 

आईसीयू प्रभारी डॉ. डीके सिंह ने कहा कि आईसीयू में जितने बेड हैं, सभी पर मरीज भर्ती थे। स्टाफ नर्स की जानकारी मिलते ही आईसीयू के स्टॉफ को तत्काल इमरजेंसी भेजकर वहां उन्हें वेंटिलेटर मुहैया कराकर समुचित इलाज शुरू कराया गया। ऐसे में आईसीयू में इलाज में लापरवाही का आरोप गलत है। अस्पताल से ही जुड़े कुछ लोग इस मुद्दे को हवा देने में लगे हैं। 
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पूर्व विधायक ने वीसी से की जांच की मांग

नेशनल इंस्टीट्यूशनल रैंकिंग फ्रेमवर्क ने जारी की रैंकिंग - फोटो : file
कांग्रेस के पूर्व विधायक अजय राय ने सही इलाज न मिलने की वजह से स्टाफ नर्स की मौत को दुखद बताते हुए कुलपति से पूरे मामले में जांच की मांग की है। कहा कि जब स्टाफ के प्रति संस्थान का यह रवैया है तो आम लोगों की स्थिति का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है। उन्होंने स्टाफ नर्सों की नाराजगी और आंदोलन का समर्थन करते हुए कहा है कि किसी तरह की लीपापोती के बजाए निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। 
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