बीएचयू के चिकित्सा विज्ञान संस्थान में एम्स जैसी सुविधा मिलने की बात चल रही है लेकिन बुनियादी संसाधनों की बात करें तो हालात बेहद चिंताजनक हैं। 1560 बेड के सर सुंदरलाल अस्पताल में तय मानक के अनुसार 150 बेड की इंटेंसिव केयर यूनिट (आईसीयू) होनी चाहिए लेकिन आपको हैरानी होगी कि यहां आईसीयू में मात्र 16 बेड हैं।
हालात ऐसे हैं कि रोजाना औसतन दस मरीजों को सीरियस कंडीशन के बावजूद आईसीयू में बेड मुहैया नहीं हो पाता। ऐसी स्थिति में अक्सर मरीजों की जान पर बन आती है। आईसीयू में बेड मुहैया न हो पाने से स्टाफ नर्स मंजू को समुचित उपचार नहीं मिल पाया और उसकी मौत हो गई।
आईसीयू में बेड मुहैया न होने का यह इकलौता मामला नहीं है। कई बार आईसीयू में बेड न मिलने और इसके चलते मरीजों की मौत होने को लेकर पहले भी हंगामा मच चुका है, बावजूद इसके अस्पताल प्रबंधन ने अब तक आईसीयू की क्षमता बढ़ाने की कोई ठोस पहल नहीं की है।
जबकि, गंभीर हालत वाले मरीजों की जिंदगी के लिए हर एक पल बेहद अहम होता है। आईसीयू में भर्ती कराने के लिए यहां तक कि चिकित्सा अधीक्षक कार्यालय से लेकर संस्थान तक के उच्चाधिकारियों के यहां रोजाना सिफारिशें आती हैं।
अस्पताल प्रशासन के अधिकारी भी स्वीकारते हैं कि आईसीयू की क्षमता कम होने से खासी दिक्कतें हो रही हैं। बीएचयू में वैसे भी पूर्वांचल के विभिन्न जिलों के अलावा आसपास के प्रांतों से रोजाना सैकड़ों मरीज पहुंचते हैं।
मरीजों के जबरदस्त दबाव के बावजूद आईसीयू की क्षमता न बढ़ाया जाना यहां चिकित्सा सुविधाओं के उन्नयन के दावों पर बड़ा सवाल है।