अस्पताल का अनुदान बढ़ा 150 गुना, सुविधाएं जीरो
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने बीएचयू अस्पताल की व्यवस्थाओं पर सवाल उठाते हुए कहा कि आज बीएचयू शिक्षा का नहीं बल्कि भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुका है। भ्रष्टाचार इस कदर है कि टेंडरों की तरह एमआरआई टेंडर में फर्जीवाड़ा हो रहा है। टेंडर समिति के विरोध के बाद एमआरआई सेवा का टेंडर फर्जी जीएसटी नंबर वाली कंपनी को आवंटित कर दिया गया।
कोविड काल में भी घोटाले नहीं रुके और जेम पोर्टल की बजाय सीधे बाजार से महंगे दामों पर दवाएं और उपकरणों की खरीद गैर कानूनी तरीके से की गई। इसका खुलासा कैग की रिपोर्ट में हुआ। कोविड राहत फंड का उपयोग मरीजों को सुविधाएं उपलब्ध करवाने की बजाय खुद की जेबें भरने में हुआ।
2011 में अस्पताल को दो करोड़ रुपये सालाना मिलता था और आज 250 से 300 करोड़ रुपए सालाना मिल रहा है। जब दो करोड़ सालाना मिलता था अस्पताल को तब मरीजों को खाना के साथ दवाएं भी फ्री में मिलती थीं। आज मरीजों को न तो दवाएं मिलती हैं और न ही खाना। अस्पताल का सरकारी अनुदान 150 गुना बढ़ा, लेकिन मरीजों को आज भी अपने जांच और इलाज के लिए पहले से ज्यादा पैसे देने पड़ते हैं।
आईसीयू मिलने से पहले ही मर रहे मरीज
प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि ब्लैकलिस्टेड और अनुभवहीन कंपनी को सीसीआई लैब थमाकर गरीब मरीजों की जेबें काटकर खुद की जेबें भरी जा रही हैं।आईसीयू बेड की स्थिति इतनी दयनीय है की मरीज आईसीयू मिलने से पहले ही अपने प्राणों को त्याग दे रहा है। प्रशासनिक गुंडागर्दी और जानलेवा लापरवाही अपने चरम पर है।