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आखिरकार बनी बात, बीएचयू अस्पताल के रेजिडेंट डॉक्टरों की हड़ताल छह दिन बाद खत्म

Mon, 01 Oct 2018 09:16 AM IST
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी
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बीएचयू अस्पताल
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बीएचयू के सर सुंदरलाल अस्पताल और ट्रॉमा सेंटर में मंगलवार दोपहर से चल रही रेजिडेंट डॉक्टरों की हड़ताल छठे दिन रविवार रात 11:00 बजे खत्म हो गई। कुलसचिव, चिकित्सा अधीक्षक और आईएमएस निदेशक के साथ करीब दो घंटे तक चली बैठक में सभी मांगें माने जाने के बाद रेजिडेंट डॉक्टर इमरजेंसी और वार्डों सहित अन्य जगहों पर काम पर लौट आए। सोमवार से ओपीडी की व्यवस्था पूर्ववत बहाल हो जाएगी। 
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सोमवार को फीमेल सर्जरी वार्ड में एक महिला और उसके  साथ आए युवक और रेजिडेंट डॉक्टरों के बीच मारपीट और फिर कैंपस में मेडिकल छात्रों के हॉस्टल पर पत्थरबाजी, आगजनी, तोड़फोड़ की घटना के बाद मंगलवार दोपहर से डॉक्टरों ने हड़ताल शुरू कर दी थी।

अगले दिन से अस्पताल और ट्रॉमा सेंटर की इमरजेंसी सेवाएं भी प्रभावित हो गई थीं। इसके बाद विश्वविद्यालय और जिला प्रशासन के अधिकारियों संग उनकी बातचीत भी हुई लेकिन वह लिखित कार्रवाई पर अड़े रहे।  
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रविवार को शाम को चिकित्सा अधीक्षक प्रो. विजय नाथ मिश्र ने सभी को वार्ता के लिए एक बार फिर बुलाया। कुलसचिव डॉ. नीरज त्रिपाठी, आईएमएस निदेशक प्रो. वीके शुक्ला के साथ करीब दो घंटे तक चली बैठक में मांगों पर चर्चा के बाद उनकी सभी मांगें मान ली गईं। प्रो. मिश्र ने कहा कि रेजिडेंट डॉक्टरों ने हड़ताल खत्म कर वार्डों और इमरजेंसी में काम शुरू कर दिया है। 

हड़ताल के आगे लाचार दिखा बीएचयू प्रशासन 

बीएचयू अस्पताल में दिखाने पहुंचे लोग - फोटो : amar ujala
बीएचयू के सर सुंदरलाल अस्पताल और ट्रामा सेंटर में रेजिडेंट डॉक्टरों की हड़ताल के आगे बीएचयू और जिला प्रशासन लाचार दिखा। छह दिन की हड़ताल में दूर दराज से आए हजारों मरीजों को बिना इलाज लौटना पड़ा। इसमें कईयों की जांच नहीं हो पाई तो कुछ के ऑपरेशन भी टालने पड़े। यहां तक कि इमरजेंसी में आने वालों को भी इलाज के लिए परेशान होना पड़ा।

यह कोई पहला मामला नहीं है, जब अस्पताल में डॉक्टरों और छात्रों से नोकझोंक-मारपीट हुई हो। इससे पहले भी घटनाएं हो चुकी हैं। इसमें जब भी जूनियर डॉक्टरों पर मुकदमा दर्ज हो जाता है तो वे हड़ताल कर देते हैं। मरीजों को वार्डों में न देखने, इमरजेंसी सेवा बाधित कर वह विश्वविद्यालय प्रशासन पर दबाव बनाते हैं।

अभी इसी साल अप्रैल में चार से सात अप्रैल तक रेजिडेंट की हड़ताल हुई थी। तब भी हड़ताल खत्म कराने में चार दिन लग गए थे। इस बीच चिकित्सा अधीक्षक प्रो. विजय नाथ मिश्रा ने जिलाधिकारी सुरेंद्र सिंह सहित जिला और पुलिस प्रशासन के अधिकारियों के प्रयास को सराहा। 
 
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ये मानी गई मांगें

 अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था त्रिसतरीय होगी। 
धनवंतरि हॉस्टल और एलबीएस हॉस्टल के बीच रास्ते पर बैरीकेडिंग होगा
विश्वविद्यालय प्रशासन मारपीट के आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेगा
वार्डों में मरीजों से मिलने वालों के लिए पास व्यवस्था का सख्ती से पालन होगा

स्टैंडिंग कमेटी की जांच की कोई समय सीमा नहीं 
विश्वविद्यालय प्रशासन ने पूरे मामले में जांच के लिए जो स्टैंडिंग कमेटी का गठन किया है, उसके लिए कोई समय सीमा निर्धारित नहीं है। हालांकि घटना के अगले दिन से ही अस्पताल से लेकर अन्य जगहों पर घटी घटनाआें का सीसीटीवी फुटेज जुटाने के साथ ही जांच की कार्रवाई चल रही है। 
 
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