सीटीवीएस विभागाध्यक्ष प्रो. सिद्धार्थ लखोटिया ने बताया कि एओर्टिक वॉल्व में रुकावट दो प्रकार की, जन्मजात और उम्र संबंधी होती है। वृद्धावस्था में एओर्टिक वॉल्व के सख्त (स्क्लेरोसिस) होने के कारण यह समस्या उत्पन्न हो सकती है। यदि समय पर इसका उपचार न किया जाए, तो यह मौत का कारण बन सकती है।
वृद्ध मरीजों में वॉल्व प्रत्यारोपण करना तकनीकी रूप से जटिल होता है। हालांकि ओपन-हार्ट सर्जरी अब भी एक विकल्प है। संस्थान के निदेशक प्रो. एसएन संखवार और मेडिकल सुपरिटेंडेंट प्रो. केके गुप्ता ने प्रत्यारोपण के लिए टीम को बधाई दी है।
इस टीम ने किया प्रत्यारोपण
कार्डियोलॉजी विभाग से प्रो. विकास अग्रवाल, डॉ. प्रतिभा राय, डॉ. सुयश त्रिपाठी, प्रो. एपी सिंह, डॉ. संजीव, डॉ. प्रतिभा (कार्डियक एनेस्थीसिया विभाग) और प्रो. सिद्धार्थ लखोटिया (सीटीवीएस विभाग) ने मिलकर मरीज का वॉल्व प्रत्यारोपण किया।