प्रो. ओमशंकर ने बताया कि अस्पताल परिसर में ही कैंटीन चलाने के लिए कई जगह खाली हैं, इसके बाद भी अस्पताल प्रशासन विभाग में क्यों कैंटीन चलवाना चाहता है, यह समझ से परे हैं। पहले से एमएस आफिस के सामने भुवालका बिल्डिंग में चलने वाले भोजनालय को बंद करवा दियागया। यह जगह भी पूरी तरह खाली पड़ी है। न्यूरोलॉजी विभाग द्वारा खाली की गई जगह और उसके उपर एंडोक्राइन लैब,गैस्ट्रो लैब वाली जगह भी खाली है।
विभागाध्यक्ष और नियमानुसार विभाग के शिक्षकों की समिति को इसकी जानकारी नहीं दी गई है। इस पर विभागीय समिति ने भी आपत्ति की है। पहले ही कार्डियोलॉजी विभाग के 47 बेड, पुराना कैथ लैब और सीसीयू को जबरन अपने कब्जे में अस्पताल प्रशासन ने ले लिया है, अब विभाग के लिए निर्धारित लाइब्रेरी, सेमिनार रूम, कंसल्टेंट चैंबर, पीएचडी शोधार्थियों की रिसर्च लैब जैसी अत्यंत आवश्यक शैक्षणिक-चिकित्सकीय जगहों में कैंटीन चलाने का आदेश दे दिया गया है।
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क्या बोले अधिकारी
ट्रॉमा सेंटर की तरह ही अस्पताल में मरीजों के लिए पेशेंट किचन चलाने के लिए टेंडर प्रक्रिया की गई है। जिसको चलाने का टेंडर मिला है, उनको एमएस की ओर से जगह एलाट किया गया है। जब टेंडर हुआ तो ताला तोड़ने की बात भी गलत है। यहां जब से काम शुरू हुआ तब अगर कोई समस्या थी तो लिखित आपत्ति करनी चाहिए थी। -प्रो.एसएन संखवार, निदेशक, आईएमएस