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बीएचयू: 46 साल पुराने गोल्ड मेडलिस्ट बनवाएंगे 250 कमरों का आदर्श हॉस्टल, 500 छात्राओं के रहने की होगी व्यवस्था

Fri, 25 Sep 2026 04:03 PM IST
Pragati Chand अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

बीएचयू के 46 साल पुराने गोल्ड मेडलिस्ट 500 छात्राओं के लिए आदर्श हॉस्टल बनवाएंगे। ईसी की बैठक में इसका प्रस्ताव स्वीकार किया गया। इसका संचालन कृषि विज्ञान संस्थान की ओर से किया जाएगा। हॉस्टल में अत्याधुनिक सुविधाएं होंगी। 
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बनारस हिंदी विश्वविद्यालय, BHU - फोटो : X (@bhupro)
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विस्तार
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बीएचयू के 46 साल पुराने गोल्ड मेडलिस्ट डॉ. एम प्रभाकर राव की ओर से 500 छात्राओं के रहने के लिए 250 कमरों का आदर्श गर्ल्स हॉस्टल बनवाया जाएगा। यह महिलाओं के फ्रेंडली होगा और इसमें अत्याधुनिक सुविधाओं वाला मेस और लाइब्रेरी आदि होंगी। इस प्रस्ताव को विवि की हालिया एग्जीक्यूटिव काउंसिल की बैठक में स्वीकार कर लिया गया। इसका कंस्ट्रक्शन भी डॉ. राव की कराएंगे। विवि की ओर से इसके लिए स्थान का निर्धारण अभी किया जा रहा है। हॉस्टल का संचालन कृषि विज्ञान संस्थान की ओर से किया जाएगा। साथ ही इसी संकाय की छात्राओं को कमरे आवंटित किए जाएंगे। इससे पहले डॉ. एम प्रभाकर राव ने आभा गेस्ट हाउस बनवाने में भी मदद की थी।

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डॉ. राव 1982 तक बीएचयू के इसी संस्थान के छात्र रहे हैं। अब वह खुद के नुजिविडू सीड्स सहित कई कंपनियों का संचालन कर रहे हैं। इन्होंने बीएचयू से बीएससी (कृषि) कोर्स कर विवि में दूसरा स्थान हासिल किया था जबकि एमएससी (कृषि) में वह विश्वविद्यालय में पहले स्थान पर रहे। बीएचयू में स्नातकोत्तर अध्ययन के दौरान उन्हें स्वर्ण पदक और मेरिट छात्रवृत्ति भी मिली थी। इसके बाद 1982 में शिक्षा पूरी करने के बाद डॉ. राव ने अपने पिता की ओर से संचालित नुजिवीडू सीड्स लिमिटेड की जिम्मेदारी संभाली। प्रभाकर आंध्र प्रदेश के गुंटूर जिले के कृषि परिवार से हैं।

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कुलपति ने भी किया था जिक्र
बीएचयू में सोमवार को एग्जीक्यूटिव काउंसिल की बैठक में इस प्रस्ताव पर सहमति बनी। इसमें बताया गया कि प्रभाकर की ओर से ही प्रस्ताव बनाकर दिया गया था। वहीं, मंगलवार को कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने भी इसका जिक्र कृषि विज्ञान संस्थान के दीक्षारंभ कार्यक्रम में भी किया था। उन्होंने कहा कि परिसर में पूर्व विद्यार्थी के सहयोग से विवि 250 कमरों वाले बालिका छात्रावास के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इससे छात्रावास की कमी को दूर करने में मदद मिलेगी।

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