1999 में सैटेलाइट से मछलियों का पता लगाया: एएस किरण कुमार ने बताया कि जियोस्टेशनरी सैटैलाइट को लॉन्च करने के बाद नासा के सहयोग से मात्र एक वर्ष में 2400 गांवों में सैटेलाइट ब्रॉडकास्टिंग सेवा शुरू की गई। इसरो की देन है कि यहां से दिल्ली वालों की बातें लाइन देख सुन पाते हैं। इसरो ने 1999 में सैटेलाइट से मछुआरों को बताया कि किस जगह पर ज्यादा मछलियां मिलेंगी।
2019 की असफलता से लिया सबक
2008 में चंद्रयान-1 ने चंद्रमा पर पानी खोजा। चंद्रयान-2 में चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव (जहां कोई नहीं उतरा था) पर लैंडिंग का लक्ष्य रखा गया, जिसके लिए पूर्ण स्वदेशी नया इंजन विकसित किया गया। 2019 की असफलता से सबक लेकर 2023 में चंद्रयान-3 ने सफल सॉफ्ट लैंडिंग की और तब पूरी दुनिया भारत की ओर देख रही थी। मंगल मिशन (मंगलयान) और आदित्य-एल1 (सूर्य किरणों का अध्ययन) की सफलताएं भी साथ में रहीं।