देश की पांचवीं और सबसे बड़ी फ्लोरल क्लॉक धूल फांक रही है। बीएचयू के श्री विश्वनाथ मंदिर के पीछे आठ लाख रुपये की लागत से बनी यह फ्लोरल क्लॉक तकरीबन ग्यारह महीने पहले बनाई गई थी। अभी तक इसे शुरू नहीं किया जा सका है। बीएचयू के अलावा बेंगलूरू के लालबाग, चंडीगढ़ के नजदीक पिंजौर गार्डन और कोलकाता और हैदराबाद में फ्लोरल क्लॉक बनाई गई है।
पिछले साल फरवरी में हैदराबाद, बंगलूरू, सूरत के इंजीनियरों ने यहां आकर फ्लोरल क्लॉक का सेटअप तैयार किया था। घड़ी की सुइयां लगाने के साथ ही कंट्रोल रूम तैयार किया जा चुका है। इसकी डायल प्लेट को फूल-पत्तियों से सजाने और पौधों से नंबर बनाने का काम बाकी है। उस वक्त के उद्यान विशेषज्ञ डॉ. एसपी सिंह ने अप्रैल में इस काम को पूरा करने का दावा किया था लेकिन इससे पहले उनकी मृत्यु होने के कारण काम आगे नहीं बढ़ सका।
बता दें कि बीएचयू में बनी यह फ्लोरल क्लॉक देश की सबसे बड़ी और पांचवीं फ्लोरल क्लॉक है, जबकि किसी विश्वविद्यालय में यह पहली क्लॉक है। देश में दूसरे जगहों पर लगाई गई फ्लोरल क्लॉक में पेंडुलम नहीं है जबकि यहां पेंडुलम भी लगाया जाना है। लोग शाम को यहां आएं और वक्त गुजारें, इस लिहाज से क्लॉक के अगल-बगल जल प्रपात बनाने और रॉक गार्डन विकसित करने का काम भी अभी तक लटका हुआ है। दूसरी ओर उद्यान विशेषज्ञ इकाई के इंचार्ज प्रो. एके सिंह का कहना है कि उन्हें विश्वविद्यालय में लगाई गई फ्लोरल क्लॉक के बारे में कोई जानकारी नहीं है।