रिंग रोड के लिए अधिग्रहीत जमीन के मुआवजे को लेकर प्रशासन व किसान आमने-सामने आ गए हैं। बुधवार की रात नदेसर स्थित एक होटल में बैठक के दौरान जहां प्रशासन रिंग रोड के लिए अधिसूचना जारी होने की तिथि (2003) से चार गुना मुआवजा देने को तैयार है, वहीं किसान नेताओं ने इसे नहीं माना और वे नए रेट से मुआवजे की मांग पर अड़े हैं।
बुधवार को नदेसर स्थित होटल में राज्यमंत्री सुरेंद्र पटेल की मौजूदगी में प्रशासनिक अधिकारी तथा एनएचएआई के अधिकारियों और मुआवजे के लिए आंदोलनरत किसानों के प्रवक्ता विजय शंकर पांडेय व अन्य किसान नेताओं के बीच वार्ता हुई। अधिकारियों ने किसानों को शासन के निर्देश के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों को 1894 भूमि अधिग्रहण अधिनियम के तहत चार गुना मुआवजा साथ में 12 प्रतिशत ब्याज देने को तैयार है।
किसानों ने यह तर्क दिया कि नियमत: उनकी जमीन का मुआवजा भूमि अधिग्रहण अधिनियम 2013 के हिसाब से मिलना चाहिए। अंतत: वार्ता का कोई हल नहीं निकला। विजय शंकर पांडेय ने कहा कि उनका प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री से मिलेगा और उनके द्वारा जब यह घोषणा की जाएगी तभी वह मानेंगे, तब तक सत्याग्रह जारी रहेगा।
उधर हृदयपुर, अहमदपुर, इदिलपुर आदि सत्याग्रह स्थलों पर आठ व नौ तारीख को निकलने वाली गांधी शांति मार्च की तैयारी को लेकर जनसंपर्क अभियान चलाया गया। इस दौरान विजय शंकर पांडेय ने कहा कि किसानों के साथ खेल खेला जा रहा है। उन गांवों के नक्शे जहां से रिंग रोड गुजरी है, संबंधित गांवों के लेखपाल को उपलब्ध कराने की मांग की। इससे कहां, कितनी जमीन अधिग्रहीत हुई है यह पता चल पाएगा। उन्होंने कहा कि रिंग रोड के मुआवजे में खेल हुआ है जिसमें प्रशासनिक अधिकारी, एनएचआई के लोग व ठेकेदार तीनों शामिल हैं।