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बीएचयू: आठ वैज्ञानिकों को 9 रिसर्च के लिए मिले छह करोड़, माइक्रोप्लास्टिक की भी होगी जांच; जानें खास

Tue, 10 Feb 2026 05:44 AM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Varanasi News: एएनआरएफ की ओर से सात और डीबीटी ने एक वैज्ञानिक को अनुसंधान का फंड दिया गया है। डीबीटी ने वनस्पति वैज्ञानिक को 1.83 करोड़ रुपये के दो प्रोजेक्ट दिए है।
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BHU - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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BHU: बीएचयू को माइक्रो प्लास्टिक, धातु प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन जैसी ग्लोबल संकटों के समाधान के लिए आठ वैज्ञानिकों को छह करोड़ रुपये से ज्यादा का रिसर्च ग्रांट दिया गया है। एडवांस रिसर्च ग्रांट के तहत अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (एएनआरएफ) ने इनमें से सात प्रोफेसरों को करीब पांच करोड़ का रिसर्च फंड दिया है। इसमें वनस्पति विज्ञान, भू विज्ञान और रसायन विज्ञान में दो-दो प्रोजेक्ट और भौतिक विज्ञान व जंतु विज्ञान विभाग को एक-एक रिसर्च प्रोजेक्ट दिया गया है।

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वनस्पति विज्ञान विभाग से डॉ. दीपक कुमार को बायो टेक्नोलॉजी विभाग (डीबीटी) की ओर से 1.83 करोड़ रुपये के दो प्रोजेक्ट दिए गए। इनकी फंडिंग बाकी सभी प्रोजेक्ट से ज्यादा है। इन प्रोजेक्ट के तहत जेआरएफ, फील्ड असिस्टेंट और एसआरएफ की भर्तियां भी होंगी। 

छह रिसर्च प्रोजेक्ट के लिए कई छात्र और छात्राओं को रिसर्च और अन्य काम के लिए नौकरी पर रखा जाएगा। रसायन विज्ञान विभाग के डॉ. कृपा राम को 75 लाख का प्रोजेक्ट माइक्रो प्लास्टिक प्रदूषण की समस्याओं की पहचान और उनके समाधान के लिए दिया गया है। 
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डॉ. राम ने बताया कि गंगा नदी और उनकी मछलियों में माइक्रोप्लास्टिक के स्तर की जांच की जाएगी। ये कार्य तीन साल के अंदर ही पूरा करना है। गंगा में अलग अलग क्षेत्र से पानी का सैंपल और मछलियों को लेकर अध्ययन को पूरा किया जाएगा।

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डॉ. अर्चना तिवारी को 97 लाख
भौतिक विज्ञान विभाग से डॉ. अर्चना तिवारी को 97 लाख रुपये हैं। वनस्पति विज्ञान विभाग से डॉ. जय प्रकाश मौर्या को 82 लाख और जंतु विज्ञान विभाग से डॉ. शुभांकर दोलाई को भी रिसर्च प्रोजेक्ट मिला है। भूविज्ञान के डॉ. आरके विक्रमादित्य सिंह को 71.64 लाख, रसायन विज्ञान विभाग से 75.02 लाख और डॉ. सतपाल सिंह बदसरा को 84.30 लाख रुपये मिले। 

इनमें से दो प्रोफेसरों को डॉ. शुभांकर दोलाई और डॉ. दिनेश कुमार नाइक की धनराशि का उल्लेख विज्ञान की बुलेटिन में नहीं है। आम तौर पर वैज्ञानिकों को ये फंड जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण सुरक्षा, अनुसंधान और विकास आदि कार्यों के लिए दिया जाता है। ये तीन से अधिकतम पांच साल तक लिए मिलता है।
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