ईसी बैठक में यह भी माना गया कि बैठकों के बीच लंबा अंतराल होने से दस्तावेजों का बोझ बढ़ जाता है। इतनी लंबी बैठक गुणवत्ता के लिहाज से भी उचित नहीं मानी गई। इस कारण अब हर तीन महीने पर बैठक कराने का निर्णय लिया गया। इस फैसले का सभी सदस्यों ने स्वागत किया। सदस्यों का कहना था कि लंबा अंतराल होने पर एजेंडा बड़ा हो जाता है, जिससे उसका मूल्यांकन कठिन हो जाता है। बीएचयू के ज्यादातर एसोसिएट प्रोफेसरों को प्रोफेसर का दर्जा दे दिया गया। कैश प्रमोशन के तहत कई शिक्षक अब डॉक्टर के बजाय प्रोफेसर लिखना शुरू कर चुके हैं।