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Education: बीएचयू की डॉ. कनु प्रिया को द्रौपदी मुर्मू ने दिया राष्ट्रीय पुरस्कार, पढ़ें- शिक्षा से जुड़ी खबरें

Fri, 26 Sep 2025 01:04 PM IST
प्रगति चंद अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Varanasi News: बीएचयू की डॉ. कनु प्रिया को द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रीय पुरस्कार दिया। डॉ. कनु प्रिया को मिला यह दूसरा राष्ट्रीय पुरस्कार है। इससे पहले उन्हें 2020 में कालिदास अकादमी, उज्जैन द्वारा राष्ट्रीय कालिदास सम्मान से सम्मानित किया गया था।  
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : फ्रीपिक
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विस्तार
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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बीएचयू के कला इतिहास की प्रोफेसर डॉ. कनु प्रिया को 64वीं राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी में राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उन्हें दो लाख रुपये नकद पुरस्कार, एक राष्ट्रीय पुरस्कार प्रमाणपत्र और एक स्मृति चिह्न भी मिला। उनकी मल्टीमीडिया कलाकृति विनाश की कगार के काम को देखते हुए इस सम्मान से नवाजा गया। 

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नई दिल्ली स्थित डॉ. बीआर अंबेडकर अंतरराष्ट्रीय केंद्र में उनको यह सम्मान दिया गया। इस पर कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने डॉ. कनु प्रिया को बधाई दी है। यह कार्यक्रम ललित कला अकादमी, संस्कृति मंत्रालय की ओर से किया गया था। डॉ. कनु प्रिया को मिला यह दूसरा राष्ट्रीय पुरस्कार है। इससे पहले उन्हें 2020 में कालिदास अकादमी, उज्जैन द्वारा राष्ट्रीय कालिदास सम्मान से सम्मानित किया गया था।  

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बीएचयू में 58 महीने के बाद 9 अक्तूबर को ईसी की बैठक

बीएचयू में 9 अक्तूबर को कार्यकारिणी परिषद (ईसी) की बैठक होगी। इससे पहले 11 अगस्त को परिचयात्मक बैठक हुई थी लेकिन यह 58 महीने के बाद बीएचयू की पहली पूर्ण ईसी बैठक होगी। इसमें बीते चार साल के कार्यों पर सहमतियां बनेंगी। 

कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी के कार्यकाल की पहली बैठक होगी, जिसकी वह अध्यक्षता करेंगे। ये बैठक काफी लंबी भी चल सकती है। कार्यकारिणी परिषद में बीती एकेडमिक काउंसिल के पारित प्रस्तावों पर मुहर के लिए भी रखा जाएगा। वहीं वरिष्ठता, प्रमोशन, नियुक्तियों के साथ ही एकेडमिक मुद्दों को एजेंडा बनाया जा सकता है। इन पर वैधता दिलानी ही होगी। 

लिहाजा कई नए मुद्दों जैसे कोर्स और विभागों के गठन के साथ ही खाली सीटों पर एक्शन प्लान बनाने, तीन साल से ज्यादा वक्त से पद पर बने रहने, एक अधिकारी के पास कई पद, प्रो. शैल चौबे के निलंबन निरस्त होने का मामला, पिछले कुलपति कार्यकाल में हुईं नियुक्तियों को इस बैठक के एजेंडे में शामिल किया जाएगा। इसके अलावा तेलुगु प्रोफेसर बुदाती वेंकटेश्वर लू के भी मामले में चर्चा हो सकती है। 

पं. दीनदयाल को क्लासरूम और एकेडमिक्स से जोड़कर शोध कराने पर सहमति

बीएचयू में पंडित दीनदयाल उपाध्याय की 109वीं जयंती पर उनको एकेडमिक जगत और क्लासरूम से जोड़कर अध्ययन और शोध पर सहमति बनी। बृहस्पतिवार को पंडित दीनदयाल उपाध्याय पीठ की ओर से आयोजित विशेष व्याख्यान में कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि पीठ के शोधार्थियों और एकेडमिक जगत को जोड़कर नए शोध कराए जाए। इससे संबंधित स्टडी मटेरियल का प्रचार और प्रसार भी किया जाए।

पीठ के समन्वयक प्रो. तेज प्रताप सिंह ने कहा कि यह भारत का पहला पीठ है जो कि बीएचयू में स्थापित हुआ। इसका ध्येय सिर्फ विचार विमर्श तक ही सीमित नहीं रहेगा बल्कि प्रकाशन और शोध कार्यों के द्वारा उनके सिद्धांतों को क्लासरूम के साथ जोड़ा जा सकेगा। 

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि समाजसेवी वीरेंद्र जायसवाल ने कहा कि हम कौन हैं और हम किस मूल्य पर टिके हैं यही पंडित दीनदयाल का मूल था। वसुधैव कुटंबकम और इंदन्नम जैसे भारतीय विचार ही उनकी दृष्टि का आधार था। बीएचयू के प्रो. प्रवेश भारद्वाज ने कहा कि अंतरिक्ष में कहीं भी यदि जल है तो हम वहां भी शांति की बात करते हैं। यही भारत की दृष्टि है। 

काशी विद्यापीठ में यूजी के पांच कोर्स में खाली सीटों पर 28 को होगी काउंसिलिंग

महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में सत्र 2025-26 में प्रवेश के लिए स्नातक के पांच कोर्स पर खाली सीटों पर 28 सितंबर को काउंसिलिंग होगी। वाणिज्य संकाय में बीकॉम, बीसीए, बीबीए, बीएफए एवं बीएससी (बायोलॉजी) पाठ्यक्रमों में विश्वविद्यालय की ओर से पूल काउंसिलिंग करवाई जाएगी। कुलसचिव डॉ. सुनीता पांडेय ने बताया कि काउंसिलिंग के बाद अभ्यर्थियों को वहीं पर बने काउंटर पर ऑनलाइन फीस जमा करना होगा। अगर कोई अभ्यर्थी निर्धारित समय में फीस जमा नहीं करता है तो उसका अभ्यर्थन निरस्त मानते हुए दोबारा मौका नहीं दिया जाएगा। 

आईआईटी बीएचयू में एआई-मशीन लर्निंग कोर्स पूरा

आईआईटी बीएचयू में एआई और मशीन लर्निंग पर चल रहा ग्लोबल इनिशिएटिव ऑफ एकेडमिक नेटवर्क्स (जीआईएएन) कोर्स बृहस्पतिवार को समाप्त हो गया। एबीएलटी 1 हॉल में 10 दिनों तक सिविल इंजीनियरिंग विभाग की ओर से चली कक्षाओं में एआई और मशीन लर्निंग की सहायता से बुनियादी ढांचों की निगरानी की बात की गई। बृहस्पतिवार को रिसर्च एंड डेवलपमेंट डीन प्रो. राजेश कुमार ने कहा कि इंफ्रास्ट्रक्चर के सतत विकास के साथ भविष्य के लिए सशक्त और टिकाऊ सिस्टम बनाने के लिए एडवांस तकनीक को लागू करना होगा। इसमें कक्षाएं लेने के लिए यूनाइटेड किंगडम की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सुस्मिता नास्कर भी पहुंची थीं। 
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अंत्योदय, एकात्म मानववाद ही विकसित भारत की सशक्त नींव

महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के पंडित दीनदयाल उपाध्याय शोधपीठ में दीनदयाल उपाध्याय की जयंती पर संगोष्ठी में वक्ताओं ने उनके व्यक्तित्व की चर्चा की। मुख्य अतिथि शहर दक्षिणी के भाजपा विधायक डॉ. नीलकंठ तिवारी ने कहा कि जनसंघ से जुड़कर पं. दीनदयाल ने भारतीय विचारधारा को एक नई दिशा प्रदान की। उनका अंत्योदय, एकात्म मानववाद ही विकसित भारत की सशक्त नींव है।

उन्होंने कहा कि पं. दीनदयाल मानते थे कि नीतियां और योजनाएं तभी सफल कहलाएंगी, जब वे समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को जीवन जीने का आत्मविश्वास दें। वर्तमान सरकार की सभी जनकल्याणकारी योजनाओं की आधारशिला पंडित दीनदयाल उपाध्याय के दर्शन व चिंतन पर ही आधारित हैं।

अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. आनंद कुमार त्यागी ने कहा कि यह विकास या शासन व्यवस्था निश्चित ही देश के महान विभूतियों की देन है। जिनके दिखाए मार्ग पर हम विश्व गुरु बनने का हौसला रखते हैं। भाषीय, जातीय आधार पर भारत का विभाजन किसी भी दृष्टि से स्वीकार्य नहीं है। अतिथियों का स्वागत और विषय प्रवर्तन शोध पीठ के निदेशक प्रो. केके सिंह, संचालन डॉ. ऊर्जस्विता सिंह और धन्यवाद ज्ञापन शोधपीठ की उप-निदेशक प्रो. शेफाली वर्मा ठकराल ने किया।
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