तीन मिनट का गोल्डन टाइम
भीड़ के बीच में सीपीआर की एक साइकिल (चक्र) पूरी करने से पहले ही मरीज ने आंखें खोल दी। डॉक्टरों ने वहीं मुंह खोलकर चेक किया तो कफ जमा था। तो एक रेजिडेंट से आयुर्वेदिक ऑपरेशन थिएटर भेजकर ऑक्सीजन की व्यवस्था कराई गई। बाद में रोगी की स्थिति सामान्य होने पर उसके परिजन उसे इमरजेंसी ओपीडी ले गए।
छह महीने पहले भी प्रो. केके पांडेय और उनकी टीम ने इसी आर्युवेद संकाय में 22्र वर्ष की एक छात्रा की जान सीपीआर देकर बचाई थी। प्रो. केके पांडेय ने बताया कि हार्ट अटैक में रेस्क्यू देने का गोल्डन टाइम तीन मिनट का होता है। यदि सीपीआर दे दिया तो ब्रेन को ऑक्सीजन की सप्लाई हो जाती है। ऐसे में वह चेतना में लौट आएगा। क्योंकि रक्त प्रवाह न होने से ग्लूकोज तक सप्लाई नहीं हो पाता।