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BHU कोरोना मरीज मामला: दो मरीजों की मौत की मजिस्ट्रियल जांच का आदेश, पीएमओ-सीएमओ ने भी मांगा जवाब

Tue, 25 Aug 2020 05:08 PM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा। - फोटो : अमर उजाला
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बीएचयू अस्पताल से कोरोना पॉजिटिव युवक के गायब होने और उसके अगले दिन कोविड-19 वार्ड के पीछे उसका शव मिलने के मामले में वाराणसी के डीएम कौशल राज शर्मा ने मजिस्ट्रियल जांच का आदेश दिया है। डीएम ने बताया कि एसीएम प्रथम और सीओ भेलूपुर 15 दिन में प्रकरण की जांच कर रिपोर्ट देंगे। वहीं इस मामले में प्रधानमंत्री आफिस (पीएमओ) और चीफ मिनिस्टर आफिस (सीएमओ) ने जिला प्रशासन से रिपोर्ट मांगी है।

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दरअसल, शनिवार की देर रात बीएचयू के कोविड वार्ड से डाफी निवासी कोरोना मरीज अजय कुमार के लापता होने की खबर मिली थी। लेकिन सोमवार देर शाम बीएचयू सुपरस्पेशियलिटी कांप्लेक्स परिसर में उसकी लाश मिलने के बाद हड़कंप मच गया। दूसरे तल पर भर्ती इस मरीज के शनिवार रात से ही लापता होने की खबर के बाद परिजन, लंका पुलिस जांच में जुटी थी। उधर शव मिलने के बाद परिजनों ने जमकर हंगामा मचाया और जमकर तोड़फोड़ भी की। इससे वहां अफरा तफरी मच गई।सूचना पाकर कई थानों की पुलिस भी पहुंच गई।


अजय के भाई ने अस्पताल प्रबंधन पर भाई की किडनी निकालने का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की है। कोरोना मरीज अजय को चोट लगने के बाद 12 अगस्त को परिजनों ने ट्रामा सेंटर में भर्ती कराया था। भाई मोनू के मुताबिक 15 अगस्त को कोरोना पॉजिटिव रिपोर्ट आने के बाद सुपरस्पेशियलिटी काम्प्लेक्स के कोविड वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया था। जहां दूसरे तल पर बेड नंबर 26 में भर्ती था।
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मोनू के मुताबिक शनिवार को दिन में दूसरे तल पर खिड़की पर आकर भाई ने बात की थी। रविवार की दोपहर जब वह भाई को जूस देने पहुंचा तो उसके वहां ना होने की जानकारी स्वास्थ्य कर्मियों ने दी। इसके बाद लंका पुलिस को तहरीर भी दी गई। इधर सोमवार की शाम करीब 7:30 बजे भाई का शव अस्पताल कैंपस में गटर में मिला है। 

बताया जा रहा है कि वो दूसरे तल पर पाइप के सहारे नीचे उतरने की कोशिश कर रहा था, जहां से गिर गया। जबकि भाई मोनू के अनुसार सुपरस्पेशियलिटी कांपलेक्स में उसका शव मिला।

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वाराणसी के बाबतपुर कैथौली निवासी अंकित पाठक के बीएचयू सर सुंदरलाल अस्पताल के कोविड-19 वार्ड की चौथे मंजिल से कूदकर जान दे दी थी। इस पर परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाया था। 16 अगस्त की शाम 5 बजे उसकी फिर से तबीयत बिगड़ने लगी, तो फिर उसे बीएचयू ट्रामा सेंटर ले गए। यहां उसका इलाज चला। परिजनों का कहना है कि अस्पताल में एमआरआई जांच करवाने के बाद रिपोर्ट की जानकारी परिजनों को नहीं होने से पहले ही बेटे को 17 अगस्त को बीएचयू अस्पताल के इमरजेंसी में भेज दिया गया। इमरजेंसी में तीसरे मंजिल पर 22 अगस्त तक इलाज चला था।

उससे पहले अस्पताल प्रबंधन ने 18 अगस्त को कोरोना वायरस की जांच करवाई थी। 21 तारीख को रीढ़ की हड्डी का जांच कराई थी। उसके बाद परिजनों को 10 दिन बाद हड्डी की जांच रिपोर्ट आने के बाद कहा गया था। इसी बीच उसकी रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आ गई।

परिजनों का कहना है कि अस्पताल प्रबंधन ने कहा कि रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आई है। इसके बाद अस्पताल ने अंकित को 22 अगस्त को ही कोविड वार्ड में भर्ती कर लिया। परिजनों ने बताया कि डॉक्टर पहले से अवगत थे कि मरीज डिप्रेशन(तनाव) में है। साथ ही मरीज को बांध कर रखा जा रहा था।

परिजनों ने अस्पताल प्रशासन से सवाल पूछे हैं कि जब मरीज बंधा हुआ था, तो कैसे वो बिल्डिंग से कूद गया। इस दौरान वार्ड के लोग क्या कर रहे थे।
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