बांसुरीवादक तुहीन पार।
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बांग्लादेश के तुहीन को चांसलर मेडल
चांसलर, महाराजा विभूति नारायण और बीएचयू गोल्ड मेडल हासिल करने वाले दूसरे मेधावी हैं बीपीए (बैचलर ऑफ परफार्मिंग आर्ट्स) के छात्र व बांग्लादेश के बांसुरीवादक तुहीन पार। उन्होंने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि मैं मनोरंजन के लिए नहीं बल्कि अध्यात्म के लिए बांसुरी बजाता हूं। इस विद्या में भगवान कृष्ण मेरे अराध्य हैं। अपने गुरुजी और पं. हरि प्रसाद चौरसिया जैसे बांसुरी वादकों से प्रभावित हूं। तुहीन ने बताया कि बांग्लादेश में ऐसा कोई संस्थान ही नहीं था जहां से बांसुरी में डिग्री हासिल की जा सके। इसलिए मैंने बीएचयू को चुना।
पिता वीएन मिश्रा के साथ यशस्विनी।
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प्रोफेसरों की गोल्ड मेडलिस्ट बेटियां
बीएचयू के 105वें दीक्षांत समारोह में तीन प्रोफेसरों की गोल्ड मेडलिस्ट बेटियों की खूब चर्चा रही। संस्कृत विभागाध्यक्ष प्रो. एसके द्विवेदी की बेटी अनुराधा द्विवेदी को चांसलर मेडल मिला। रेक्टर प्रो. संजय कुमार की बेटी विधि संकाय की संजना शिखर को गोल्ड मेडल मिला। लेकिन, संजना मेडल लेने नहीं आ सकीं। संजना शिखर लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से एलएलएम कर रही हैं। न्यूरोलॉजी विभाग के प्रो. वीएन मिश्र की बेटी यशस्विनी मिश्र को एमए/एमएससी साइकोलॉजी में टॉप करने पर गोल्ड मेडल से नवाजा गया। यशस्विनी को स्व. चंद्रभाल द्विवेदी मेमोरियल गोल्ड मेडल और स्व. शेफाली नंदी मेमोरियल गोल्ड मेडल भी दिया गया।
महामना को मेरे परदादा ने दी थी धर्मशास्त्र की शिक्षा
स्वतंत्रता भवन सभागार में मुख्य अतिथि डॉ. वीके सारस्वत और कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी से बीएचयू गोल्ड मेडल पाकर मंच से उतरे युवा व्याकरणशास्त्री श्रीनिकेतनाथ पांडेय ने महामना को प्रणाम किया। संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय में व्याकरण विभाग के आचार्य के छात्र श्रीनिकेतनाथ पांडेय ने कहा कि बीएचयू की स्थापना के पीछे उनके पूर्वजों का बड़ा योगदान रहा है। महामना पंडित मदन मोहन मालवीय के गुरुजी मेरे परदादा काशीनाथ शास्त्री थे। मणिकर्णिका घाट की नीलकंठ गली स्थित घर पर ही परदादा काशीनाथ ने मनुस्मृति सहित सभी धर्मशास्त्रों को पढ़ाया था।