वाराणसी। अस्पतालों में नॉन कोविड मरीजों के बेहतर इलाज का दावे तो किए जा रहे हैं, लेकिन आलम यह है कि बीएचयू ट्रामा सेंटर की इमरजेंसी में जगह न होने की वजह से ठंड के मौसम में मरीजों को मजबूरी में गलियारे में स्टेचर पर इलाज कराना पड़ रहा है।
कोरोना काल में बीएचयू अस्पताल और ट्रामा सेंटर में मरीजों की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। अस्पताल की ओपीडी में जहां आधे से अधिक विभागों में जगह फुल हो गई है, वहीं अस्पताल के साथ ही ट्रामा सेंटर के इमरजेंसी में भी वाराणसी और आसपास के जिलों से आने वाले मरीजों को बेड नहीं मिल पा रहे हैं। परिजन भी मजबूरी में गलियारे में ही मरीज का इलाज करा रहे हैं। शुक्रवार को ट्रामा सेंटर प्रवेश द्वार से लेकर अंदर तक जगह-जगह गलियारे में मरीज स्ट्रेचर पर ही पड़े रहे। जल्द ही समस्या का ठोस समाधान नहीं हुआ तो समस्या बढ़ सकती है।
विभिन्न घटनाओं में घायल 80 से 100 मरीज ट्रामा सेंटर में हर दिन आते हैं, इमरजेंसी में कुल बेड की संख्या 45 हैं। ट्रामा सेंटर आने वाले सभी मरीजों का पहले कोविड टेस्ट हो रहा है, रिपोर्ट निगेटिव आने तक उन्हें होल्डिंग एरिया में रखना पड़ रहा है। स्ट्रेचर पर भी मरीजों का हर संभव बेहतर इलाज किया जा रहा है।-प्रो. संजीव गुप्ता, प्रभारी, ट्रामा सेंटर बीएचयू
बीएचयू : इमरजेंसी पर भी बढ़ा दबाव
बीएचयू अस्पताल की इमरजेंसी में भी इन दिनों दबाव अधिक बढ़ गया है। ट्रामा सेंटर की तरह ही यहां भी दूरदराज से आने वाले कई मरीजों को बेड नहीं मिल पा रहा है और उन्हें स्ट्रेचर पर रहना पड़ रहा है। जब तक कोविड रिपोर्ट निगेटिव न आ जाए तब तक इमरजेंसी के होल्डिंग एरिया में रखा जाना है, लेकिन यहां इमरजेंसी का हर वार्ड मरीजों से भरा है।
शुक्रवार को सुबह मरीजों की संख्या इतनी अधिक थी कि इमरजेंसी में स्ट्रेचर के अलावा उसके बाहर भी एक्स रे कक्ष के गलियारे तक मरीज स्ट्रेचर पर पड़े रहे। इस बारे में इमरजेंसी के फैकेल्टी इंचार्ज डॉ. विक्रम गुप्ता का कहना है कि इमरजेंसी में आने वाले सभी मरीजों का नियमानुसार बेहतर इलाज किया जा रहा है। जैसे जैसे मरीजों की रिपोर्ट आती है, उन्हें संबंधित विभाग के वार्ड में शिफ्ट किया जाता है।