बीएचयू की चीफ प्रॉक्टर ने तुगलकी फरमान सुना दिया। इस फरमान ने कैंपस में रहने और आने-जाने वालों को मुश्किल में डाल दिया। इस आदेश से परेशान शिक्षकों ने कुलपति से इसकी शिकायत की। कुलपति ने भी इस पर आपत्ति जताई और पर छह घंटे बाद चीफ प्रॉक्टर ने आदेश वापस ले लिया।
मालवीय भवन के ठीक बगल में कुलपति आवास है। इसमें बने लॉन में अमूमन कुलपति सुबह टहलते हैं। चीफ प्रॉक्टर रोयाना सिंह ने अपने आदेश में इस बात का जिक्र किया है कि कुलपति प्रो. राकेश भटनागर के लॉन में सुबह 6 से 7 बजे तक जब टहल रहे होंगे, उस समय सामने सड़क से केवल लोग पैदल ही जा सकेंगे। दो-चार पहिया वाहन इधर से नहीं गुजरेगा।
इसके बाद ही गार्डों ने रास्ते पर वाहनों को रोक दिया। आवास के पास ही आईएमएस के शिक्षकों के आवास हैं, आगे सभी हॉस्टल हैं, उसी रास्ते से छात्र भी निकलते हैं। शनिवार सुबह स्कूल जाने के लिए कुछ बच्चे अपने अभिभावकों संग कार से निकले तो गार्डों ने आदेश का हवाला देते हुए उन्हें रोक दिया।
इस पर अभिभावकों ने स्कूल में देरी की बात कही लेकिन वह नहीं माने। दोपहर में कुछ शिक्षकों ने कुलपति को इस आदेश की जानकारी दी। इस पर आपत्ति जताते हुए कुलपति ने तत्काल आदेश वापस लेने का निर्देश दिया।
चीफ प्रॉक्टर प्रो. रोयाना सिंह का कहना है कि कुलपति को वाहनों की आवाजाही से कोई असुविधा न हो, इसलिए आदेश जारी किया था। बाद में आपत्ति आई तो वापस कर लिया गया।
कुलपति प्रो. राकेश भटनागर का कहना है कि आदेश कब जारी हुआ मुझे पता नहीं है। चीफ प्रॉक्टर से बात करूंगा कि भविष्य में लोगों को असुविधा वाला कोई आदेश जारी न किया जाए।