बीएचयू कोर्ट के 46 में से 45 सदस्यों का कार्यकाल खत्म हो चुका है। कुछ का कार्यकाल महीने भर पहले तो कुछ का सात-आठ महीने पहले खत्म हुआ है। इस समय कोर्ट मेंबर के तौर पर संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के प्रो. रजनीश द्विवेदी ही हैं। कोर्ट सदस्यों का कार्यकाल खत्म होने से बीएचयू के चांसलर का चुनाव भी लटका है। ऐसे में जब तक कोर्ट के नए सदस्य नहीं चुने जाएंगे, तब तक चांसलर का भी पद रिक्त रहेगा।
बीएचयू के चांसलर डॉ. कर्ण सिंह का कार्यकाल दिसंबर में समाप्त हो चुका है। इसके बाद बीएचयू में कई ऐसे बड़े आयोजन चांसलर के बगैर हुए। इसमें संस्कृति महोत्सव जैसा आयोजन भी था, जिसमें 22 दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी शिरकत की थी। 16 जनवरी को विश्वविद्यालय का 99वां दीक्षांत भी चांसलर के बिना हो गया।
बीएचयू कोर्ट का गठन विजिटर यानी राष्ट्रपति करते हैं। कोर्ट सदस्यों के कुछ नाम विश्वविद्यालय की ओर से भी प्रस्तावित किए जाते रहे हैं। इस बार अब तक विश्वविद्यालय की ओर से कोई नाम प्रस्तावित नहीं किया गया है। बता दें कि कोर्ट सदस्य और चांसलर दोनों का ही कार्यकाल तीन साल का होता है।