वाराणसी। बीएचयू और क्योटो यूनिवर्सिटी अब पर्यावरण और आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में मिलकर शोध करेंगे। शुक्रवार को दोनों विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधियों के बीच एमओयू (मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग) पर हस्ताक्षर किया गया।
बीएचयू के केंद्रीय कार्यालय में क्योटो के ग्रेजुएट स्कूल आफ ग्लोबल एनवायरमेंटल स्टडीज के डीन प्रो. शिजीओ फूजी और बीएचयू के रजिस्ट्रार डॉ. केपी उपाध्याय ने इस शोध एवं शैक्षणिक समझौते पर हस्ताक्षर किए।
इस अवसर पर क्योटो यूनिवर्सिटी के शोध छात्र रॉनित चटर्जी और बीएचयू के शोध छात्र प्रमित वर्मा द्वारा बनारस के 90 वार्डों पर तैयार की गई शोध रिपोर्ट का भी विमोचन किया गया। इसकी प्रति महापौर रामगोपाल मोहले को भी सौंपी गई।
समझौते के बाद क्योटो यूनिवर्सिटी के प्रो. राजीब शॉ ने बताया कि क्योटो यूनिवर्सिटी का दुनिया के करीब 100 शैक्षणिक संस्थानों के साथ समझौता है लेकिन भारत के किसी विश्वविद्यालय के साथ यह पहला समझौता है।
बीएचयू के पर्यावरण एवं धारणीय विकास संस्थान (आईईएसडी) और क्योटो यूनिवर्सिटी के ग्रेजुएट स्कूल ऑफ ग्लोबल एनवायरमेंटल स्टडीज के बीच जलवायु परिवर्तन और आपदा प्रबंधन पर संयुक्त रूप कार्य करने की सहमति हुई है।
आईईएसडी बीएचयू के निदेशक प्रो. एएस रघुवंशी ने बताया कि विश्वविद्यालय के शताब्दी वर्ष में हुआ ये समझौता बेहद खास है क्योंकि यह सीधे काशी के विकास और पर्यावरण से जुड़ा हुआ है।
इसके तहत एक अप्रैल से स्टूडेंट एक्सचेंज प्रोग्राम शुरू हो जाएगा। चार महीने बाद दोनों यूनिवर्सिटी के बीच एक और समझौता होगा, जिसमें बीएचयू के अन्य संकाय और विभागों को भी शामिल किया जाएगा।
इस मौके पर बीएचयू रेक्टर प्रो. कमलशील, मेयर रामगोपाल मोहले, काउंसलर मासे हीरोयूकी, जापानी एंबेसी के मंत्री अकियो इसो माता आदि मौजूद रहे।