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बीएचयू प्रशासन ने 56 छात्रों के दोबारा प्रवेश पर लगाई रोक, ये है आरोप

Thu, 19 Jul 2018 01:28 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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तीन साल में हुई घटनाओं को आधार बनाकर फैसला - फोटो : अमर उजाला
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बीएचयू कैंपस में नया सत्र शुरू होते ही विश्वविद्यालय प्रशासन ने कड़ा फैसला लेकर घटनाओं पर अंकुश लगाने की कोशिश की है। बीएचयू प्रशासन ने प्रवेश प्रक्रिया के बीच अलग-अलग संकायों और विभागों में 56 छात्रों को दोबारा प्रवेश पर रोक लगा दी गई है। इन पर पिछले तीन साल में घटी घटनाओं को आधार बनाते हुए कार्रवाई की गई।
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छात्रों के निलंबन के साथ ही इन्हें प्रवेश सहित अन्य सुविधाओं से वंचित करते हुए इसकी सूचना संबंधित संकायों, विभागों के प्रमुख, परीक्षा नियंत्रक आदि को भी दी गई है। उधर, इस कार्रवाई को लेकर छात्रों में गुस्सा है और वह इसके लिए कुलपति से मिलने के साथ ही आंदोलन की तैयारी कर रहे हैं।  कुलसचिव कार्यालय की ओर से इसका आदेश 16 जुलाई को ही जारी किया जा चुका है।

इसमें एक अक्तूबर 2016 को बीएचयू अस्पताल में मारपीट के मामले में चार छात्रों का नाम शामिल है। 31 अगस्त 2016 में ट्रॉमा सेंटर में हुई मारपीट के मामले में 16 छात्रों को निलंबित किया गया है। 22 जनवरी 2016 को शोध छात्रा के साथ यौन उत्पीड़न में अंग्रेजी विभाग के पूर्व शोध छात्र और आईएमएस में हुई एक घटना में एक छात्र पर कार्रवाई करने का भी जिक्र है।
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इसके अलावा सात अप्रैल 2017 को दर्शनशास्त्र विभाग के गेट पर मारपीट मामले में 16 छात्रों का निलंबन, मारपीट के एक अन्य मामले में चार छात्र, 26 दिसंबर 2017 को हुई घटना के मामले में लोक संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम के तहत 14 छात्रों को निलंबित करने का आदेश जारी हुआ है।

उप कुलसचिव (शिक्षण) की ओर से छात्रों की सूची सभी संस्थानों के निदेशक, संकाय प्रमुख, विभागाध्यक्ष, कॉलेजों के प्रिंसपल, परीक्षा नियंत्रक, चीफ प्रॉक्टर को भी भेजी गई है।

बीएचयू की  चीफ प्रॉक्टर प्रो. रोयाना सिंह ने कहा कि  पूर्व में हुई घटनाओं में जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर ही ये कार्रवाई हुई है। इससे छात्रों को सबक लेना चाहिए। कैंपस का माहौल अशांत करने वालों पर दंडात्मक कार्रवाई होगी। इसलिए छात्रों को इस तरह की गतिविधियों में संलिप्तता से बचना चाहिए। 

दो साल, छह घटना, छात्रों का भविष्य अधर में

बीएचयू कैंपस में नया सत्र शुरू होते ही विश्वविद्यालय प्रशासन ने कड़ा फैसला लेकर घटनाओं पर अंकुश लगाने की कोशिश की है। साथ ही यह भी संकेत देने की कोशिश की है कि मारपीट आदि घटनाओं में संलिप्त छात्रों को किसी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।

16 जुलाई को जारी आदेश के मुताबिक दो साल में छह बड़ी घटनाएं हुई, जिसमें कार्रवाई की जद में आए 56 छात्रों का भविष्य अधर में पड़ सकता है। इस आदेश के पीछे विश्वविद्यालय प्रशासन चाहता है कि अब अगर इनमें से कोई प्रवेश लेना भी चाहे तो उसका दाखिला नहीं हो पाएगा।

विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से की गई इस कार्रवाई में जिन घटनाओं का जिक्र किया गया है, वह सभी पूर्व कुलपति प्रो. जीसी त्रिपाठी के कार्यकाल की है। उसमें कुछ को डिबार किया गया है तो कुछ को संबंधित घटना के आरोप में निलंबित भी किया जा चुका है।

कुछ को प्रवेश सहित अन्य सुविधाओं से वंचित किया जा चुका है। अब जबकि काउंसलिंग चल रही है तो इसकी सूचना संबंधित संकायों, विभागों के प्रमुख, परीक्षा नियंत्रक आदि को भी दी गई है, जिससे कि इनका प्रवेश न हो सके।

16 जुलाई को जारी आदेश में 22 जनवरी 2016 को शोध छात्रा के साथ यौन उत्पीड़न में अंग्रेजी विभाग के पूर्व शोध छात्र और आईएमएस में हुई एक घटना में एक छात्र पर कार्रवाई करने का भी जिक्र है। 31 अगस्त 2016 में ट्रॉमा सेंटर में हुई मारपीट के मामले में 16 छात्रों के निलंबन के साथ ही एक अक्तूबर 2016 को बीएचयू अस्पताल में मारपीट के मामले में चार छात्रों की कार्रवाई भी शामिल है।  

इसके अलावा सात अप्रैल 2017 को दर्शनशास्त्र विभाग के गेट पर मारपीट मामले में 16 छात्रों का निलंबन, मारपीट के एक अन्य मामले में चार छात्रों की कार्रवाई और 26 दिसंबर 2017 को हुई घटना के मामले में लोक संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम के तहत 14 छात्रों को निलंबित किया जा चुका है। 

आदेश पर भी उठने लगे सवाल

विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से प्रवेश को लेकर जारी आदेश पर सवाल भी खड़ा हो रहे हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से जिन छात्रों पर कार्रवाई को आधार बनाकर प्रवेश से रोका गया है, उसमें से अधिकांश छात्र इस समय विश्वविद्यालय में किसी न किसी संकाय, विभाग में प्रवेश लेने की तैयारी में है।

इसके अलावा कुछ तो पिछले एक दो सालों में पढ़ाई पूरी कर डिग्री लेकर यहां से जा भी चुके हैं। अब सवाल है कि जब कार्रवाई पहले ही हो चुकी थी तो उन्हें परीक्षा से क्यों नहीं रोका गया। आखिर अब प्रवेश रोकने की याद क्यों आ रही है।

दो साल में इन पर हुई कार्रवाई
स्नातक-42 छात्र
स्नातकोत्तर-10 छात्र
स्नातकोत्तर पूर्व छात्र-2
पूर्व शोध छात्र-1
एमडी/एमएस छात्र-1
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कुलपति से विरोध दर्ज कराएंगे छात्र

प्रो. राकेश भटनागर - फोटो : अमर उजाला
विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से की गई इस कार्रवाई से छात्रों में आक्रोश है। गुरुवार को कुछ छात्र इसके लिए कुलपति प्रो. राकेश भटनागर से मिलकर अपना विरोध भी दर्ज करा सकते हैं। बीएचयू से जुड़े सोशल मीडिया के ग्रुपों पर इस पर प्रतिक्रिया भी शुरू हो गई है। छात्र इस आदेश पर सवाल खड़ा करते हुए इसे मनमाना पूर्ण कार्रवाई बता रहे हैं।
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