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BHU: 70 हजार लोगों ने देखी पुष्प प्रदर्शनी, फूल, शाक और फलों के 17 विजेता; गुलदाउदी-गुलाब के कटे फूल को इनाम

Sun, 28 Dec 2025 05:47 AM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Flower Exhibition in BHU: काशी हिंदू विश्वविद्यालय के संस्थापक भारत रत्न महामना पंडित मदन मोहन मालवीय की जयंती पर पुष्प प्रदर्शनी लगाई गई। इस दौरान दो घंटे में 8700 लोग पहुंचे और हजारों फूलों के बीच भौरों की तरह से गुंजन करते रहे।
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मालवीय स्मृति पुष्प प्रदर्शनी में जुटे लोग। - फोटो : संवाद
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Varanasi News: महामना जयंती पर बीएचयू में 70 हजार लोगों ने मालवीय स्मृति पुष्प प्रदर्शनी देखी। शनिवार को बीएचयू में पुरस्कार वितरण समारोह के साथ तीन दिवसीय मालवीय स्मृति पुष्प प्रदर्शनी का समापन हो गया। कुल 17 प्रतिभागियों को विजेता घोषित कर सम्मानित किया गया।

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प्रदर्शनी में पेड़-पौधों से तैयार पशु और पक्षियों पर बने टॉपिएरो के लिए केंद्रीय पौधशाला, बीएचयू को पहला पुरस्कार दिया गया। पंखुड़ियों की रंगोली से लेकर मंडपम आदि के विजेताओं के नाम घोषित किए गए। मेसर्स न्यू ग्लोब नर्सरी मंडुआडीह के गुलाब के फूल को किंग ऑफ दी शो और आईआईटी बीएचयू को क्वीन ऑफ दी शो के लिए सम्मानित किया गया।

बीएचयू के कोचिन हाउस को नरेंद्र देव कप
गुलदाउदी के फूल और कोलियस और हरी रंग की पत्तियों के लिए बीएचयू के केंद्रीय पौधशाला के गार्डेन इंचार्ज को सर्वश्रेष्ठ सम्मान काशी हिंदू विश्वविद्यालय कप और शील्ड पुरस्कार दिया गया। गुलाब के कटे फूल के लिए छावनी परिषद को काशी हिंदू विश्वविद्यालय कप दिया गया। वहीं आईआईटी बीएचयू को गुलाब के कटे फूल के लिए बीएचयू शील्ड सम्मान मिला।

महामना 150वीं जयंती कप के लिए श्री विश्वनाथ मंदिर बीएचयू और शील्ड के लिए धीरेंद्र कन्या महाविद्यालय को विजेता घोषित किया गया। मंडुआडीह की दूसरी नर्सरी को फलों के लिए बीएचयू कप और बीएचयू के कोचिन हाउस को शाकभाजी में बेहतर प्रदर्शन के लिए आचार्य नरेंद्र देव कप दिया गया।
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हर पेशे से जुड़े लोगों के परिश्रम को सम्मानित करना जरूरी
पुष्प प्रदर्शनी में तीन दिनों तक बागवानी की समृद्ध परंपरा, जैविक रूप से उगाई गई सब्जियां, गमलों में उगाए गए औषधीय पौधे, मसाले और पुष्प कला की विविध झलकियां देखने को मिलीं। मुख्य अतिथि आईआईटी-बीएचयू के निदेशक प्रो. अमित पात्रा ने कहा कि जीवन के हर क्षेत्र और हर पेशे से जुड़े लोगों के परिश्रम को पहचानना और सम्मानित करना बहुत जरूरी है। क्योंकि ऐसा सम्मान उन्हें और बेहतर कार्य करने के लिए प्रेरित करता है। प्रो. सरफराज आलम ने प्रदर्शनी की रिपोर्ट प्रस्तुत की।
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