अखरी बाईपास निवासी अंजली वर्मा कृषि को भविष्य का क्षेत्र मानती हैं। उनका कहना है कि इसमें शोध की संभावनाएं कभी समाप्त नहीं होंगी। उनका कहना है कि जीवन का लक्ष्य खाद्य विकल्प विकसित करना है, जिससे कि आम लोगों को भी सस्ता और पौष्टिक भोजन मिल सके। मूल रुप से ओडिशा की रहने वाली सैश्री बीएचयू से एग्रीकल्चर की पढ़ाई कर रही हैं। बताया कि पिताजी कृषि विभाग में कार्यरत रहे हैं, इस वजह से इस विषय के प्रति रूझान अधिक है।
कोविड से पहले कृषि में छात्राओं की संख्या काफी कम थी लेकिन इसके बाद इसमें तेजी से बढ़ोतरी हुई है। अब छात्राएं इसे एक सशक्त और संभावनाओं से भरे करियर के रूप में देख रही हैं। उन्होंने कहा कि बीएचयू में बेटियों की बढ़ती भागीदारी न केवल शिक्षा के क्षेत्र में बदलाव का संकेत है बल्कि यह देश की कृषि व्यवस्था को भी नई दिशा देने की ओर एक मजबूत कदम है। - प्रो. अंजना, कृषि विज्ञान संस्थान बीएचयू
छात्राओं का रुझान कृषि शिक्षा में बढ़ रहा है, यह सराहनीय है। पहले इसको खेती-किसानी के विषय के रुप में ही देखा जाता था। अब समय के साथ-साथ शोध, नवाचार, के साथ तकनीक का विकास भी हुआ है। विद्यार्थियों विशेषकर छात्राओं का रूझान बढ़ने के पीछे यह भी मुख्य है। स्टार्ट अप के साथ साथ सरकारी सहायता भी मिल रही है। - प्रो. पीके सिंह, कृषि विज्ञान संस्थान