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बीएचयू: एग्रीकल्चर में 200 विद्यार्थी, इनमें 105 छात्राएं; बीते पांच साल में 44 फीसदी छात्राओं ने लिया दाखिला

Mon, 30 Mar 2026 01:14 PM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Varanasi News: बीएचयू और यूपी कॉलेज के आंकड़े इस बदलाव की स्पष्ट तस्वीर पेश कर रहे हैं। शिक्षकों का कहना है कि कोरोना के बाद कॅरिअर को लेकर बढ़ी जागरूकता और कृषि क्षेत्र में उभरती संभावनाओं ने छात्राओं को इस दिशा में तेजी से आकर्षित किया है।
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बीएचयू कैंपस में जाती छात्राएं। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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विश्वविद्यालय और कॉलेजों में कृषि शिक्षा के प्रति छात्राओं की दिलचस्पी बढ़ रही है। यही वजह है कि इस विषय में दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों में छात्राओं की संख्या साल दर साल बढ़ रही है। बीएचयू में ही 2026 में 200 विद्यार्थियों ने कृषि विज्ञान संस्थान में दाखिला लिया। इसमें छात्राओं की संख्या 105 है। यह पिछले पांच साल की तुलना में सर्वाधिक आंकड़ा है।

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बीएचयू के कृषि विज्ञान संस्थान के आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्ष 2021 में दाखिला लेने वाले कुल 186 विद्यार्थियों में छात्राओं की संख्या 72 थी। 2022 में ये संख्या बढ़ी। 2022 में 230 सीटों पर 96 छात्राओं ने दाखिला लिया। वर्ष 2025 में कुल 260 विद्यार्थियों में 120 छात्राएं शामिल रहीं। जबकि वर्ष 2026 में 200 में 105 छात्राओं ने संस्थान में दाखिला लिया है। 

वहीं, यूपी कॉलेज में बीएससी कृषि तृतीय वर्ष में 166 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं इनमें 90 छात्राएं हैं। यह आंकड़ा बताता है कि अब छात्राएं न केवल कृषि शिक्षा में दाखिला ले रही हैं, बल्कि शोध के क्षेत्र में भी कदम आगे बढ़ा रही हैं। 

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छात्राओं ने कही ये बात

अखरी बाईपास निवासी अंजली वर्मा कृषि को भविष्य का क्षेत्र मानती हैं। उनका कहना है कि इसमें शोध की संभावनाएं कभी समाप्त नहीं होंगी। उनका कहना है कि जीवन का लक्ष्य खाद्य विकल्प विकसित करना है, जिससे कि आम लोगों को भी सस्ता और पौष्टिक भोजन मिल सके। मूल रुप से ओडिशा की रहने वाली सैश्री बीएचयू से एग्रीकल्चर की पढ़ाई कर रही हैं। बताया कि पिताजी कृषि विभाग में कार्यरत रहे हैं, इस वजह से इस विषय के प्रति रूझान अधिक है।
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इनकी भी सुनें

कोविड से पहले कृषि में छात्राओं की संख्या काफी कम थी लेकिन इसके बाद इसमें तेजी से बढ़ोतरी हुई है। अब छात्राएं इसे एक सशक्त और संभावनाओं से भरे करियर के रूप में देख रही हैं। उन्होंने कहा कि बीएचयू में बेटियों की बढ़ती भागीदारी न केवल शिक्षा के क्षेत्र में बदलाव का संकेत है बल्कि यह देश की कृषि व्यवस्था को भी नई दिशा देने की ओर एक मजबूत कदम है। - प्रो. अंजना, कृषि विज्ञान संस्थान बीएचयू

छात्राओं का रुझान कृषि शिक्षा में बढ़ रहा है, यह सराहनीय है। पहले इसको खेती-किसानी के विषय के रुप में ही देखा जाता था। अब समय के साथ-साथ शोध, नवाचार, के साथ तकनीक का विकास भी हुआ है। विद्यार्थियों विशेषकर छात्राओं का रूझान बढ़ने के पीछे यह भी मुख्य है। स्टार्ट अप के साथ साथ सरकारी सहायता भी मिल रही है। - प्रो. पीके सिंह, कृषि विज्ञान संस्थान
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