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BHU: 15 दिन, 30 कक्षाएं और सर्टिफिकेट... भारतीय दर्शन और परंपरा की स्पेशल क्लास, आठ अगस्त तक करें आवेदन

Tue, 07 Jul 2026 05:02 PM IST
Pragati Chand अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Varanasi News: वाराणसी में 15 दिन की भारतीय दर्शन और परंपरा की स्पेशल क्लास चलेगी। इस दौरान 30 कक्षाएं होंगी। छात्र-छात्राओं को एक हजार रुपये, शोधार्थियों को 1500 रुपये और प्रोफेसरों को 2500 रुपये शुल्क के तौर पर देने होंगे।
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बीएचयू कैंपस में जाती छात्राएं - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बीएचयू में भारत के दर्शन, ज्ञान परंपरा और विरासत को 15 ही दिनों में समझाया जाएगा। इसके लिए 15 दिन की स्पेशल कार्यशाला आयोजित की जा रही है। 15 दिन की कार्यशाला में 30 कक्षाएं होंगी। अंत में इसकी परीक्षा देनी होगी। उत्तीर्ण होने और मानकों को पूरा करने पर सर्टिफिकेट दिया जाएगा। 
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इस कार्यशाला में हिस्सा लेने के लिए फीस भी अदा करनी होगी। छात्र-छात्राओं को एक हजार रुपये, शोधार्थियों को 1500 रुपये और प्रोफेसरों को 2500 रुपये शुल्क के तौर पर देने होंगे। इसके लिए आवेदन करने की अंतिम तिथि आठ अगस्त है। 

भारत अध्ययन केंद्र में 10 अगस्त से लेकर 31 अगस्त तक ये कक्षाएं ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों मोड में चलेंगी। इसमें भारत के महान व्यक्तित्वों, उनके विचारों और राष्ट्रनिर्माण में अपनी भूमिका निभाने वाली संस्थाओं के योगदान का अध्ययन कराया जाएगा। 
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कई विश्वविद्यालयों और प्रतिष्ठित संस्थानों से विद्वान, शिक्षाविद् और विषय-विशेषज्ञ आमंत्रित किए गए हैं। इसमें देश-विदेश के इच्छुक प्रतिभागी अपनी सुविधा के अनुसार ऑनलाइन या फिर परिसर में उपस्थित होकर इस कार्यशाला से जुड़ सकते हैं। 
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90% से कम उपस्थिति पर नहीं मिलेगा सर्टिफिकेट 
कार्यशाला को केवल व्याख्यान-शृंखला न बनाकर एक शैक्षणिक प्रशिक्षण कार्यक्रम के रूप में संचालित किया जाएगा। प्रतिभागियों का मूल्यांकन निम्नलिखित आधारों पर किया जाएगा। इसमें 60 अंकों की ऑनलाइन बहुविकल्पीय परीक्षा होगी जो सभी व्याख्यानों पर आधारित होगी। 30 अंकों का असाइनमेंट प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। 10 अंकों का ओवरऑल प्रजेंटेशन देना होगा। 

कार्यशाला पूर्णता प्रमाण-पत्र सिर्फ उन्हीं प्रतिभागियों को दिया जाएगा जो न्यूनतम 90 फीसदी उपस्थिति सुनिश्चित करेंगे। ऑनलाइन वस्तुनिष्ठ परीक्षा में सम्मिलित होंगे और असाइनमेंट जमा करेंगे। भारत अध्ययन केंद्र के समन्वयक प्रो. शरदिंदु कुमार तिवारी ने बताया कि यह कार्यशाला भारतीय ज्ञान परंपरा के अकादमिक अध्ययन को मजबूत करने और भारत की बौद्धिक व सांस्कृतिक विरासत के प्रति नई पीढ़ी में जागरूकता विकसित करने की दिशा में एक बड़ी पहल है।
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