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बनारसः रेव पार्टी मामले में दोषी इंस्पेक्टर को हटाए गया

Mon, 12 Feb 2018 05:27 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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up police - फोटो : अमर उजाला
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बनारस की रेव पार्टी मामले में नियम-कानूनों को धता बताने और अस्सी घाट पर डीएम के बुलाने के बावजूद डेढ़ घंटे बाद पहुंचने वाले इंस्पेक्टर भेलूपुर अशेषनाथ सिंह पर कार्रवाई के बजाय उन्हें क्राइम ब्रांच में भेज दिया गया। इंस्पेक्टर अनुपम श्रीवास्तव को भेलूपुर को चौक थाने में तैनात किया गया है।
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दुर्गा कुंड स्थित बत्रा बैंक्वेट हाल में 10 जनवरी को आयोजित रेव पार्टी मामले में आईजी रेंज की जांच में इंस्पेक्टर भेलूपुर अशेषनाथ दोषी पाए गए थे। बैंक्वेट हाल से शराब के नशे में धुत युवक और युवतियां गिरफ्तार किए गए थे।

एक ही अपराध के तीन आरोपियों को जमानत देकर शेष 30 को इंस्पेक्टर भेलूपुर ने जेल भेज दिया। आरोपियों के मेडिकल मुआयने में घंटों की देरी की गई और सार्वजनिक स्थान पर मद्यपान के आरोप में कार्रवाई नहीं की गई।
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यही नहीं, बीते दिनों अस्सी घाट पर सुबह-ए-बनारस कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे डीएम योगेश्वर राम मिश्र ने अस्सी घाट पर कुछ लोगों को गांजा पीते देखा तो इंस्पेक्टर भेलूपुर को मौके पर तलब किया। इंस्पेक्टर लगभग डेढ़ घंटे बाद मौके पर पहुंचे थे।

रेव पार्टी मामले में भी आईजी की जांच में इंस्पेक्टर को दोषी पाया गया था। इंस्पेक्टर पर तभी से कार्रवाई तय मानी जा रही थी लेकिन परनिंदा की नोटिस जारी कर जवाब तलब करने के बाद उन्हें क्राइम ब्रांच से संबद्ध कर दिया गया है। 
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चौक को मिली नई तैनाती

दालमंडी - फोटो : File Photo
दालमंडी में अवैध निर्माण के मामले में मीडिया के खिलाफ बयानबाजी कर सुर्खियों में आए चौक के इंस्पेक्टर अशोक कुमार सिंह को मंडुवाडीह थाने के थानाध्यक्ष के तौर पर तैनाती दी गई है। अशोक कुमार सिंह के स्थान पर इंस्पेक्टर राहुल शुक्ला को चौक थाने में तैनात किया गया है।

रविवार को एसएसपी राम कृष्ण भारद्वाज ने कहा कि चौक थानाध्यक्ष रहे इंस्पेक्टर अशोक कुमार सिंह के दालमंडी अवैध निर्माण को लेकर वायरल वीडियो की जांच कराई गई थी।

सीओ कोतवाली की जांच में सामने आया कि अचानक सामने आई आक्रोशित भीड़ को नियंत्रित करने के लिए इंस्पेक्टर ने जो सही प्रतीत हुआ वो किया। साथ ही, उन्होंने सार्वजनिक रूप से माफी मांगते हुए कहा था कि उनका उद्देश्य मीडिया के खिलाफ किसी को उकसाना नहीं था।

जांच रिपोर्ट में अशोक सिंह दोषी नहीं पाए गए थे। महकमे में चर्चा है कि जिनकी वजह से कप्तान की भी किरकिरी हुई, उनको आनन-फानन में दोबारा चार्ज देने की इतनी जल्दी क्या थी।
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