वाराणसी। धर्म सम्राट स्वामी करपात्री जी महाराज की तपोभूमि धर्मसंघ में रविवार को देवी भागवत पुराण के प्रसंगों पर पं. श्रीकांत शर्मा बाल व्यास ने विस्तार से रोशनी डाली।
उन्होंने कहा कि जिस तरह बिना सूर्य की किरणों के बिना प्रकाश संभव नहीं है, उसी तरह बिना भक्ति के किसी व्यक्ति का आर्थिक, सामाजिक या मानसिक विकास नहीं हो सकता।
बाल व्यास ने कहा कि देवी भागवत मां दुर्गा के दिव्य स्वरूप का ही प्रतिरूप है। जो इसे किसी भी रूप में आत्मसात करता है, वह मां की कृपा से आत्मबली हो जाता है। देवी की भक्ति करने वाला जिस रास्ते पर चलता है, विकास का रथ अपने आप उसके साथ चलने लगता है।
उन्होंने कहा कि अतीत को भूल कर वर्तमान को जीने वाला हमेशा तरोजाता रहता है। माता-पिता के चरणों की सेवा करने की उन्होंने प्रेरणा दी। कहा कि पुराणों में देवी की महिमा बहुत गाई गई है। इसलिए कि लोक मंगल की आधारशिला देवियां ही मानी गई हैं।
शक्ति का महास्वरूप देवियां ही हैं। इस दिन उन्होंने मधु कैटभ वध, ग्रीव दानव वध की कथा की व्याख्या की। उन्होंने कहा कि देश को तमाम दानव खोखला करने में लगे हैं। उनसे निबटने की जरूरत है। बाहर से भले देश की हालत अच्छी लगती हो लेकिन भीतर से खोखला नजर आ रहा है।
ऐसी स्थिति से निबटने के लिए संकल्प शक्ति, इच्छा शक्ति और कल्पना शक्ति के विकास की जरूरत है। इस मौके पर इंद्रचंदर अग्रवाल, कमलेश बाजोरिया, अवधेश खेमका, गोपाल दास अग्रवाल, जय किशन केडिया,सुरेश तुलस्यान समेत तमाम लोग उपस्थित थे।