रिंकू एक साधारण परिवार से ताल्लुक रखते हैं। रिंकू के पिता ब्रह्मदीन सिंह पेशे से एक ट्रक ड्राइवर थे और उन्होंने ड्राइविंग कर रिंकू का पालन-पोषण किया। जब रिंकू बेसबाल खेलने अमेरिका गए, तब घर की माली हालत सुधरी। 68 वर्षीय पिता ब्रह्मदीन सिंह आज भी गांव में ही रहते हैं और जब रिंकू के बारे में कोई चर्चा कर दे तो फिर जो भाव उनके चेहरे पर नजर आता है, उस गर्व और सुखानुभूति को शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता है। रिंकू सिंह और सौरव गुर्जर की टीम का नाम है इंडस शेर। बृहस्पतिवार को उन्होंने ईवर राइज टीम की कनाडा के पहलवानों चेस पार्कर और मैट मार्टल को हराया।
रिंकू सिंह के जीवन पर बन चुकी है फिल्म
ज्ञानपुर। जूनियर राष्ट्रीय भाला प्रतियोगिता के विजेता रिंकू की राह शुरुआती दिनों में आसान नहीं थी। यही कारण है कि जब वर्ष 2008 में टेलीविजन शो ‘द मिलियन डॉलर आर्म’ में भाग लेने का मौका मिला तो रिंकू ने प्रतियोगिता को जीतकर ही दम लिया। उसके बाद तो रिंकू ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। उनका अमेरिका की नामी बेसबाल टीम से करार हो गया। रिंकू के जीवन संघर्ष से प्रभावित होकर उन पर डिज्नी ने ‘द मिलियन डॉलर आर्म’ नामक फिल्म भी बनाई थी।