अंटार्कटिका के भारतीय रिसर्च स्टेशन में काम कर रहे रामेंद्र
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अंटार्कटिका के भारतीय रिसर्च स्टेशन में काम कर रहे भदोही जिले के नेवादा गांव निवासी रामेंद्र उपाध्याय को वहां बेहद कठिन क्लाइमेटिक परिस्थितियों में काम करने के लिए पोलर मैन की उपाधि से नवाजा गया है। मैत्री अनुसंधान के चीफ एलेग्जेंडर ने यह उपाधि देकर सम्मानित किया।
रामेंद्र को सम्मान मिलने के बाद घर और गांव वाले गदगद हैं। नेवादा गांव निवासी एवं सेवानिवृत्त उप कृषि निदेशक ब्रह्मदेव उपाध्याय के पौत्र रामेंद्र उपाध्याय का चयन भारतीय रिसर्च स्टेशन में मैनेजर के पद पर हुआ है। वह अंटार्कटिका में रिसर्च करने के अलावा विभिन्न देशों के होनहारों के शोध की जांच करते हैं।
वहां पर छह माह रात और छह माह दिन होने के साथ तापमान बेहद कम होने से ठंड ज्यादा पड़ती है। वहां रहने वाले लोगों को काफी कठिन परिस्थितियों में समय गुजारना पड़ता है। अंटार्कटिका में 21 जून को मनाए जाने वाले मिड विंटर डे के मौके पर रामेंद्र को पोलर मैन की उपाधि देकर सम्मानित किया गया।
यह उपाधि भारत के मैत्री अनुसंधान बेस के सभी सदस्यों को दी गई। रूसी अनुसंधान बेस नोवोलाजारेवेस्क्या अंटार्कटिका के स्टेशन चीफ एलेक्जेंडर ने सभी को सम्मानित किया।
अमर उजाला से फोन पर बातचीत के दौरान रामेंद्र ने बताया कि वर्तमान समय में वहां पर छह माह रात का समय चल रहा है। अगस्त में सुबह होगी। इसके बाद वहां छह माह दिन ही रहेगा।