हर जेब में नोट फिर भी छोटी-छोटी जरूरतें पूरी करने के लिए लोग तरसते रहे। अधिकांश लोगों को जीवन में पहली बार अहसास हो रहा था कि जेब में पांच सौ या हजार-हजार के नोट होते हुए भी वे बिल्कुल खाली हाथ हैं, बेबस और लाचार हैं। बुधवार को हर तरफ यही हाल था। खाने-पीने, खरीदारी और सफर करने से लेकर रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने के लिए पांच सौ और हजार के नोट रखने वाले लोग कहीं गिड़गिड़ाते दिखे तो कहीं मारपीट पर उतारू नजर आए। खास बात यह रही कि 100, 50, 20 और 10 के नोट रखने वालों को हाथों हाथ लिया गया। पांच सौ, हजार के नोट लेकर घर से निकलने वालों को भारी दुश्वारियों का सामना करना पड़ा। बड़े नोट के फेर में आमजन तो जूझे ही, बाजार भी बेजार रहा। कई दूकानदारों की तो शाम तक बोहनी भी नहीं हो सकी।
बुधवार की सुबह तरह-तरह की समस्याओं-आशंकाओं के साथ हुई। केराना से लेकर दूध की दूकानों पर पांच सौ और हजार के नोट रखने वालों को ना कह दिया जा रहा था। राशन और सब्जी की दूकान पर भी लोग नोट तो बड़ा लेकर पहुंचे पर उनके पास फुटकर न होने की वजह से मना कर दिया गया। होटल या ढाबे पर खाने पहुंचे लोगों से पहले ही यह पूछ लिया जा रहा था कि फुटकर पैसे हैं या नहीं। यात्रियों को पानी की बोतल लेने के लिए भी तरसते देखा गया। रेलवे स्टेशन और रोडवेज बस अड्डों पर शुरू में पांच सौ और हजार के नोट स्वीकार किए जा रहे थे पर दोपहर तक खुले पैसे की समस्या होने के बाद बड़े नोट लेना बंद कर दिया गया। ऐसे में कई यात्रियों को या तो यात्रा कैंसिल करनी पड़ी या फिर बिना टिकट ही यात्रा करते देखा गया।
कैंट रेलवे स्टेशन पर टिकट काउंटर पर लाइन में लगे कई लोग ऐसे थे जो हजार और पांच सौ का फुटकर लेने के उद्देश्य से पहुंचे थे। 10 रुपये का प्लेटफार्म टिकट और 990 लौटाने की समस्या आने पर ऐसे लोगों को मना कर दिया गया। बाजार में भी लोगों को खरीदारी में इसी प्रकार की समस्या से लोग दो-चार होते रहे।
पांच सौ और एक हजार के नोट बंद होने का असर पर्यटन व्यवसाय पर भी पड़ा। देसी-विदेशी सैलानियों को होटल से लेकर रेस्त्रां तक पैसे के लेनदेन में समस्या आई। पर्यटकों के पास अमूमन 500 या 1000 रुपये के नोट होते हैं। इंग्लैंड से मार्क लीवो के नेतृत्व में आए दल का बनारसी खानपान का स्वाद लेने का अरमान दिल में ही रह गया, क्योंकि दल ने जब भी पांच सौ-एक हजार के नोट निकाले रेस्टोरेंट और होटल वालों ने मना कर दिया। पानी की बोतल खरीदने के लिए भी समस्या झेलनी पड़ी। वहीं कोलंबो (श्रीलंका) से गिरी उत्वा के नेतृत्व में सारनाथ आए 85 सदस्यीय दल को खंडहर परिसर में प्रवेश के लिए ऐड़ी-चोटी का जोर लगाना पड़ा। बाद में संबंधित विहार के अधिपति के हस्तक्षेप के बाद उनको प्रवेश मिल पाया। सारनाथ में टिकट लेने के दौरान ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ा। सारनाथ खंडहर परिसर और संग्रहालय में प्रवेश के लिए विदेशी सैलानियों के टिकट को लेकर टूर एजेंसियों को खूब पापड़ बेलने पड़े। कई बार तो एएसआई को भी दखल देना पड़ा।
बड़े नोट बंद होने से ग्राम्यांचल के किराना, जनरल स्टोर, मोबाइल शॉप से लेकर आभूषण की दूकानों पर ग्राहक कम दिखे। दिन भर दूकानदार ग्राहकों का इंतजार करते रहे। तमाम दूकानदारों की तो बोहनी तक नहीं हुई। जिन दूकानों में ग्राहक पहुंचे, वहां से 500 और 1000 रुपये के नोट के चलते बिना खरीदारी के लिए लौटना पड़ा। कई जगह किचकिच भी हुई। कछवा रोड के सब्जी मंडी के अढ़तिया अजय पटेल ने बताया कि फुटकर की समस्या के चलते ज्यादातर किसान सब्जियां उधार बेचकर ही चले गए। राजातालाब सब्जी मंडी के अढ़तिया राजकुमार गुप्ता ने बताया कि मंडी मे रोज की अपेक्षा काफी कम बिक्री हुई।
सरकार की ओर से पांच सौ और एक हजार रुपये के नोट बंद करने की घोषणा के बाद शहर में अफरातफरी की स्थिति है। बुधवार को बाबतपुर एयरपोर्ट स्थित मनी एक्सचेंज काउंटर पर जमकर हंगामा हुआ। लोगों का आरोप था कि काउंटर पर पांच सौ और एक हजार रुपये के नोट नहीं लिए जा रहे हैं। जबकि सरकार का आदेश है कि एयरपोर्ट पर 72 घंटे तक नोट लिए जाएंगे। शाम चार बजे ही कर्मचारी काउंटर बंद कर चले गए। एयरपोर्ट के कार्यवाहक निदेशक आरके वर्मा ने हंगामे से इनकार करते हुए कहा कि करेंसी न होने पर कर्मचारी पहले ही चले गए।
उधर डाफी टोल प्लाजा पर पांच सौ के नोट न लेने के कारण लंबा जाम लग गया। बाद में पुलिस ने टोल को फ्री करा दिया। एनएच-2 स्थित टोल प्लाजा पर बुधवार को दिन में दस बजे के बाद वाहनों की भीड़ बढ़ने लगा था। कर्मचारियों के पांच सौ का नोट न लेने से हंगामा होने लगा। करीब तीन किमी तक वाहनों की कतार लग गई। पुलिस और प्रशासन के निर्देश पर टोल को फ्री कर दिया गया। उधर शाम को केंद्र सरकार की ओर से 11 नवंबर की आधी रात तक टोल को फ्री कर दिया गया। वहीं शहर के पेट्रोल पंपों पर भी नोकझोंक होती रही। कुछ पंपों पर तो सौ, दो सौ के तेल मिल रहे थे लेकिन ज्यादातर पंप के कर्मचारी पांच सौ रुपये का तेल भराने को कह रहे थे। दानगंज के बलरामपुर में पेट्रोल पंपों पर विवाद बढ़ने पर पुलिस ने एक व्यक्ति को हिरासत में ले लिया और सुरक्षा के लिए सिपाही तैनात किए गए।