वाराणसी। जगत जननी जगदंबा के नौ स्वरूपों की उपासना का वासंतिक नवरात्र व्रत 21 मार्च से शुरू होगा। काशी में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों के साथ ही मां गौरी के भी नौ स्वरूपों के दर्शन होंगे।
इस बार षष्ठी तिथि के क्षयवती होने से नवरात्र आठ दिन का ही होगा। द्वारका-शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वरूपानंद की मौजूदगी में भी देवी की आराधना होगी। नवरात्र भर अस्सी घाट के दक्षिणी तट पर संत मोरारी बापू राम कथा का रसपान कराएंगे।
वासंतिक नवरात्र चैत्र शुक्ल प्रतिपदा शनिवार से आरंभ होगा। वैदिक मंत्रोच्चार के साथ घट स्थापन कर मां की नौ दिनी उपासना की जाएगी। इसके लिए सनातनधर्मी परिवारों में घर-घर में अनुष्ठान की तैयारी है। मंदिरों में विशेष पाठ और आराधना की जाएगी।
शैलपुत्री, दुर्गाकुंड में दुर्गा जी, दशाश्वमेध घाट की शीतला माता के दरबार और आदि बुढ़िया माता की गुफा में नवरात्र की आराधना की खास तैयारियां हैं। महावीर पंचांग के संपादक पं. रामेश्वर नाथ ओझा के मुताबिक नवरात्र में मां की यथाशक्ति आराधना से भक्तों को मनोरथ पूरे होते हैं। कलियुग की देवी मां दुर्गा ही हैं। शनिवार की सुबह से ही कलश स्थापना का मुहूर्त है।