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दो साल पहले ही तय हो गया था बनारस आना

Fri, 20 Mar 2015 02:22 AM IST
वाराण्ासी, ब्यूरो
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वाराणसी। सोलर इंपल्स-2 के ‘बनारस कनेक्शन’ के पीछे यूं तो कई कारण हैं लेकिन कई लोग इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जोड़कर देख रहे हैं। यह प्रचारित किया जा रहा है कि पीएम का संसदीय क्षेत्र होने के नाते इंपल्स-2 यहां आया। हालांकि अभियान दल का कुछ और ही कहना है।
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सूर्यदूत (इंपल्स-2) को लेकर अहमदाबाद से बनारस पहुंचे स्विस पायलट आंद्रे बोर्शबर्ग ने कहा कि इस साहसिक अभियान के लिए हमने दुनिया का सबसे सुरक्षित हवाई मार्ग चुना है। अहमदाबाद और बनारस उसी हवाई मार्ग में आते हैं। इस रूट पर हवा का बहाव पश्चिम से पूरब की ओर है।
हवा की रफ्तार से सामंजस्य बिठाने में इस रूट पर दिक्कत कम आती है। यही वजह है कि हमारी टीम ने अपने मिशन के लिए इसी रूट को चुना।
उधर, स्विस दूतावास के वरिष्ठ सलाहकार (शिक्षा, शोध और अनुसंधान) इंद्रनील घोष ने बताया कि साल 2012 से ही इंपल्स-2 की तैयारी चल रही है। विमान का निर्माण जब अंतिम चरण में था तभी से उसके सफर का रोडमैप तैयार हो रहा था।
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 मौसम, हवा का दबाव, हवाई मार्ग की व्यस्तता और मीडिया माइलेज जैसे तमाम पहलुओं पर मंथन के बाद हमने मिशन का खाका तैयार किया। बताया कि इंपल्स-2 का पूरा सेटअप स्विट्जरलैंड से अबूधाबी (यूएई) लाया गया और यहां से मस्कट (ओमान) के रास्ते हम अहमदाबाद होते हुए बनारस पहुंचे।
 वहीं बनारस से म्यांमार के लिए उड़ान भरने से पूर्व इंपल्स-2 पायलट पिकार्ड ने कहा, ‘बनारस एशिया का सबसे व्यस्त हवाई मार्ग होने के बाद भी सबसे सुरक्षित है। प्रोटोटाइप विमान के लिए इस रूट पर हवा का दबाव उतना नहीं जितना दूसरे मार्गों पर है। इतना ही नहीं बनारस दुनिया का बड़ा पर्यटक स्थल भी है। यहां की हरेक गतिविधि पर दुनिया भर के मीडिया की निगाहें रहती हैं।’ बकौल पिकार्ड, ‘अभियान को मीडिया माइलेज दिलाना और अपने मिशन को पूरी दुनिया में पहुंचाना भी बनारस आने का हमारा एक मकसद था।’
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