नगर निगम के विज्ञापन उपविधि में सुधार के बाद अब नहीं चलेगी मनमानी
माई सिटी रिपोर्टर
वाराणसी। निजी भवनों पर पोस्टर चिपकाने, वॉल राइटिंग कराने से पहले भवन स्वामी की लिखित अनुमति लेनी होगी। सार्वजनिक भवनों, दिशा सूचकों, महत्वपूर्ण सूचनाओं, नोटिस वाले विज्ञापन पत्रों पर पोस्टर लगाना, कुछ भी लिखना पूर्णत: प्रतिबंधित और दंडनीय अपराध की श्रेणी में माना जाएगा। नगर निगम विज्ञापन उपविधि में सुधार के बाद अब मनमानी नहीं चल पाएगी।
इसे नगर निगम (आकाश चिह्न, विज्ञापनों का नियंत्रण एवं अनुज्ञप्ति शुल्क वसूली) उपविधि कहा जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर उपविधि में संशोधन भी किया जाएगा। इसके लिए कार्यकारणी और सदन की अनुमति ली जाएगी। शहर में विज्ञापनों के लिए नगर आयुक्त की अध्यक्षता में कमेटी गठित की गई है। इसमें चार सदस्य हैं। नगर आयुक्त की ओर से नामित अपर नगर आयुक्त, मुख्य अभियंता, जोनल अधिकारी, विभागाध्यक्ष विज्ञापन को रखा गया है। इसके अलावा नगर आयुक्त और मेयर को अधिकार होगा कि वे चाहे तो एक या एक से अधिक सदस्य समायोजित कर सकते हैं।
इन प्रकार के विज्ञापनों के लिए अनुमति लेना अनिवार्य
विद्युत डिजिटल विज्ञापन, भू विज्ञापन, बारामदा-दुकान विज्ञापन, दीवार विज्ञापन, प्रक्षिप्त विज्ञापन, शामियाना विज्ञापन, आकाशीय विज्ञापन, अस्थायी एवं विविध विज्ञापन, ट्रैफिक पुलिस बूथ विज्ञापन, जन सुविधा स्थान विज्ञापन, जन सुविधा स्थापन विज्ञापन, विशेष प्रकार छतरी विज्ञापन, पताका, झंडी, गुबारा विज्ञापन, ट्री गार्ड फ्लावर पार्ट विज्ञापन, गैंट्री विज्ञापन, फसाड, वॉलरैप, वाटर टैंक विज्ञापन, फुट ओवर ब्रिज विज्ञापन के लिए अनुमति जरूरी होगी।
उल्लंघन पर दो हजार रुपये प्रतिदिन से लेकर एक लाख रुपये तक लगेगा जुर्माना
शहर की सुंदरता बिगाड़ने वाले विज्ञापन पर जुर्माना लगाया जाएगा। जोनल अधिकारी निरीक्षण कर संबंधित संस्था को कारण बताओ नोटिस जारी कर जुर्माना आरोपित करेंगे। नोटिस में जोनल अधिकारी के अंतिम निर्णय के बाद प्रभावित पक्ष नगर आयुक्त के यहां अपील कर सकता है। नगर आयुक्त का अंतिम निर्णय होगा। इस उपविधि के उपबंधों के अनुसार एक लाख रुपये या इससे अधिक का जुर्माना लगाया जा सकता है। इसके अलावा दो हजार रुपये प्रतिदिन के हिसाब से भी जुर्माना लग सकता है।