फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

केवल डिग्री हासिल न करें उद्यमशील बनें युवा

Tue, 31 May 2016 02:13 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
विज्ञापन
बीएचयू में व्याख्यान देते कथावाचक मुरारी बापू।
विज्ञापन
मानस मर्मज्ञ संत मोरारी बापू ने सोमवार को बीएचयू के शताब्दी व्याख्यान में रामचरित मानस के सार्वभौम सार की व्याख्या की। कहा कि मानस का सार सत्य, प्रेम और करुणा जैसे बिंदु हैं। इसे दुनिया भर में प्रचारित-प्रसारित करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि यदि मानस के सार को हम अपने जीवन में उतार सके तो विश्व का कल्याण होगा। युवाओं को मानस का सार समझाते हुए कहा कि केवल डिग्री हासिल करने से बात नहीं बनेगी, युवाओं में उद्यमशीलता भी होनी चाहिए।
विज्ञापन


स्वतंत्रता भवन सभागार में आयोजित शताब्दी व्याख्यान में मोरारी बापू ने कहा कि काशी हिंदू विश्वविद्यालय भारत के लिए वरदान तथा विश्व के लिए प्रकाश एवं प्रेरणा का केंद्र बिंदु है। महामना की चेतना ने जो संकल्प लिया था, उसमें संकीर्णता कभी नहीं हो सकती। कहा कि मैं जितनी बार बीएचयू परिसर में आता हूं, मुझे ऐसा अनुभव होता है कि किसी तीर्थ में आया हूं। मुझे लगता है कि इस विश्वविद्यालय में कभी कोई कठिनाई नहीं होगी। हां, देश-काल, परिस्थिति का थोड़ा बहुत असर पड़ सकता है। बापू ने कहा कि बीएचयू दस बिंदुओं का ऐसा कार्यक्रम बनाए जिससे समूचा विश्व लाभान्वित हो। कहा कि व्यास पीठ से बीएचयू के छात्र-छात्राओं को रामकथा के माध्यम से वे खुद नवजीवन देने का प्रयास करेंगे। 

मानस मर्मज्ञ मोरारी बापू ने गंगा की पवित्रता को अनिवार्य बताया और कहा कि युवाओं में कल्याणकारी विचारधारा और गतिशीलता होनी चाहिए। केवल डिग्री हासिल कर लेने से कुछ नहीं होता, उद्यमशीलता होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि कभी-कभी असफलता भी सफलता की ओर अग्रसर करती है। युवाओं में कृत्य और नृत्य का संगम होना चाहिए, तभी विश्व का कल्याण होगा। किसी भी संस्था में तीन चीजें शील, बुद्धि और बल आवश्यक है। कहा कि हमारी संस्कृति और संस्कार बचा रहे, ऐसा संदेश बीएचयू से पूरी दुनिया में जाना चाहिए।
विज्ञापन


कुलपति प्रो. जीसी त्रिपाठी ने कहा कि बीएचयू महामना का जीवंत विग्रह है। महामना की दृष्टि एवं विश्वविद्यालय की संस्कृति इस संस्था के संचालन का आधार है। कहा कि बीएचयू जीवन के समस्त क्षेत्राें में संस्कृति एवं संस्कार को बनाए रखने में सफल रहा है। बदलते परिदृश्य में महामना के जीवन का संकल्प आज मार्गदर्शन कर रहा है। व्याख्यान से पूर्व कुलपति ने संत मोरारी बापू को अंगवस्त्र और स्मृति चिह्न भेंटकर उनका सम्मान किया। कुलसचिव डॉ. केपी उपाध्याय तथा छात्र अधिष्ठाता प्रो. एमके सिंह ने मंचासीन अतिथियों को पुष्पगुच्छ भेंट किया।

इस मौके पर संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय वेद विभाग के वरिष्ठ आचार्य डॉ. उपेंद्र त्रिपाठी की पुस्तक ‘शिव संकल्प’ का विमोचन संत मोरारी बापू ने किया। यहां प्रधानमंत्री के अग्रज सोम दामादोर दास मोदी, अनंत नारायण सिंह, काशी विद्यापीठ के कुलपति डॉ. पृथ्वीश नाग, बीएचयू की कार्य परिषद और विद्वत परिषद के सदस्य, शहर के गण्यमान्य लोग, शिक्षक एवं छात्र मौजूद थे। संचालन मालवीय भवन के मानद निदेशक प्रो. उपेंद्र पांडेय ने किया।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें