आरिज को फांसी की सजा होने के बाद आजमगढ़ में जालंधरी मुहल्ला स्थित चाचा के घर के बाहर पसरा सन्नाटा।
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इसी डिस्पेंसरी पर आरिज का भाई साबिज भी रहता है। एक और भाई शारिक दिल्ली में निजी कंपनी में नौकरी करता है। 2018 में आरिज की नेपाल बार्डर से गिरफ्तारी के बाद से ही परिजनों ने उसके मुद्दे पर चुप्पी साध रखी है। आठ मार्च को दिल्ली के साकेत न्यायालय ने उसे दोषी करार दिया था। सजा के लिए 15 मार्च की तिथि नियत की थी। सोमवार को सुबह से ही आरिज के परिजन व गांव के लोग सजा की जानकारी को लेकर उत्सुक जरूर थे, लेकिन वे कुछ भी बोलने को तैयार नहीं थे।
समाचार चैनलों पर जैसे ही आतंकी आरिज को फांसी की सजा सुनाने की बात सामने आई। उसके परिजनों व रिश्तेदारों के घरों के दरवाजे बंद हो गए। मीडिया तो क्या इस मुद्दे पर वे किसी से कुछ भी बात करने से कतराते नजर आए। आरिज उर्फ जुनैद को इंस्पेक्टर मोहन चंद्र शर्मा व अन्य पुलिसकर्मियों पर फायर कर फरार होने का आरोप था, जिसमें सोमवार को उसे फांसी की सजा साकेत न्यायालय ने सुनाई है।
पढ़ाई के दौरान गलत शोहबत का हुआ शिकार
बाटला कांड के बाद चर्चा में आया आतंकी आरिज उर्फ जुनैद शुरू से ही काफी होशियार था। घर से बाहर रह कर वह इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहा था। इसी दौरान वह गलत शोहबत में आ कर देश विरोधी गतिविधियों में लिप्त हो गया। आज जेल की सलाखों के पीछे पहुंच चुका आरिज कई बम विस्फोटों के साथ ही बाटला कांड में मारे गए इंस्पेक्टर मोहन चंद शर्मा पर फायर करने का दोषी भी है।