बेसिक शिक्षा अधिकारी डा. राजेंद्र सिंह का कहना है कि रिपोर्ट कार्ड छापने के लिए ई-टेंडर स्थानीय स्तर पर किया गया था। उसका प्रारूप निदेशालय से ही भेजा गया था। छपाई की गलती के लिए संबंधित फर्म के भुगतान में पांच फीसदी की कटौती कर दी गई है।
बता दें कि कक्षा एक से कक्षा पांच तक के विद्यार्थियों को ऐसे अंकपत्र दे दिए गए हैं जिनमें ये साबित करना मुश्किल है कि ये अंकपत्र उन्हीं के हैं। इस अंक पत्र के आधार पर बच्चों को दूसरी जगह प्रवेश लेना मुश्किल हो जाएगा।