दो हजार करोड़ रुपये सालाना टर्नओवर वाले बनारसी साड़ी कुटीर उद्योग पर गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) का बोझ दूसरे ढंग से डाल दिया गया है।हैंडलूम, हैंडलूम फैब्रिक, सिल्क यार्न को तो जीएसटी में शामिल नहीं किया गया है लेकिन बनारसी साड़ी बनाने के लिए जो उपकरण लगते हैं, उन पर कर लगाया गया है।
जकाट की पत्तियां (जिस पर बनारसी साड़ी की डिजाइन की कटिंग की जाती है), लोहे की फन्नी, लकड़ी का ताना-बाना जीएसटी के दायरे में है। इससे साड़ी की निर्माण लागत पर असर पड़ेगा।
बनारसी वस्त्र उद्योग एसोसिएशन महामंत्री राजन बहल बताते हैं कि फाइव स्टार होटल में ठहर कर बनारसी साड़ी खरीदने वाले विदेशी निर्यातकों पर पहले 18 फीसदी टैक्स था लेकिन अब जीएसटी में इसे बढ़ाकर 28 प्रतिशत कर दिया गया है।
इससे बनारसी साड़ी के विदेशी निर्यातकों के काशी आने की संख्या घट सकती है। टेलीफोन पर भी जीएसटी लगा दिया गया है। साड़ी का कारोबार फोन के जरिए ही ज्यादा होता है।
रेशम तागा संघ के संरक्षक मोहन लाल सरावगी बनारसी साड़ी की डिजाइन की नकल अब तक कहीं नहीं की जा सकी है। इसे टैक्स के दायरे में लाना, बनारस की पहचान से खिलवाड़ करना है।
बनारसी वस्त्र उद्योग एसोसिएशन के महामंत्री राजन बहल ने कहा कि इस कुटीर उद्योग से करीब ढाई लाख परिवारों का सीधे भरण-पोषण जुड़ा है। इस पर किसी तरह का और किसी भी रूप में टैक्स लगाना अनुचित है।