इनमें से रोहित सिंह उर्फ सोनू और रोशन गुप्ता उर्फ किट्टू पुलिस मुठभेड़ में मारे गए। वहीं, हैदर की सोनभद्र जिले के चोपन क्षेत्र के जवारीडाड़ गांव के समीप गोली मारकर हत्या कर दी गई। फहीम जिला जेल में और अजय उर्फ विजय सिंह सहारनपुर जेल में बंद है। शेष अन्य आरोपी जमानत पर बाहर हैं।
संत प्रसाद उर्फ गुड्डू जायसवाल ने बताया कि उनकी दोस्ती नदेसर स्थित एक होटल के मालिक विजय जायसवाल से थी। विजय से दोस्ती के कारण उनकी व उनके भाई जवाहर के मुकदमे की वह पैरवी करते थे। एक मुकदमे में जवाहर जायसवाल की जमानत खारिज हो गई। इसके बाद लचर पैरवी का आरोप लगाकर जवाहर और उसके बेटे गौरव ने उन्हें जान से मारने की धमकी दी। संत प्रसाद ने कहा कि हत्या उनकी ही की जानी थी। 22 अप्रैल 2012 को फहीम अंसारी उर्फ रिंकू सहित दो बदमाश उनके घर भी आए थे, लेकिन वह बाहर नहीं निकले। अगले दिन गलतफहमी में उनकी शक्ल से मिलते-जुलते उनके चचेरे भाई महेश की हत्या कर दी गई। बदमाशों को लगा कि वह जिसे गोली मार रहे हैं, वह मैं ही हूं।
संत प्रसाद ने बताया कि हत्या के इस मुकदमे के लिए बहुत संघर्ष करना पड़ा। समाजवादी पार्टी की सरकार होने के कारण पूर्व सांसद जवाहर जायसवाल के खिलाफ पुलिस कोई कार्रवाई ही करती थी। पुलिस की विवेचना सही से न होते देख वर्ष 2015 में इलाहाबाद हाईकोर्ट से गुहार लगाई गई। हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि एसएसपी की निगरानी में विवेचना कराई जाए, लेकिन, आदेश का अनुपालन सही तरीके से नहीं हुआ। वर्ष 2018 में पुन: इलाहाबाद हाईकोर्ट में निष्पक्ष विवेचना की गुहार लगाई गई। हाईकोर्ट ने तत्कालीन एसएसपी को तलब कर निष्पक्ष विवेचना का आदेश दिया। इसके बाद जाकर जवाहर और गौरव का नाम मुकदमे में बतौर आरोपी शामिल हुआ।
बैंककर्मी महेश जायसवाल की हत्या की आपराधिक साजिश रचने के आरोपी बनाए जाने के बाद पुलिस ने जवाहर जायसवाल और उसके बेटे गौरव की तलाश शुरू की तो दोनों भूमिगत हो गए थे। इसी मामले में 25 हजार के इनामी घोषित किए गए जवाहर जायसवाल को जनवरी 2019 में एसटीएफ की वाराणसी इकाई ने मध्य प्रदेश के दमोह से गिरफ्तार किया था। वहीं, गौरव जायसवाल ने कोर्ट में समर्पण किया था। बाद में बाप-बेटे को इलाहाबाद हाईकोर्ट से जमानत मिली और वह रिहा कर दिया गया।