पैसे और विवादित प्रॉपर्टी का था नशा
पुलिस सूत्रों के अनुसार, बनारसी की व्यक्तिगत दुश्मनी बहुत कम थी। उसका असली खेल पैसों और विवादित जमीन के इर्द-गिर्द घूमता था। वह ऐसे मामलों में खुद को सुपारी किलर के तौर पर पेश करता था और मोटी रकम लेकर लोगों को रास्ते से हटाता था।
सारनाथ में हुई हत्या से एक सप्ताह पहले ही बनारसी यादव ने सारनाथ और उसके आसपास अपना ठिकाना बना लिया था और मौका देख तीन अन्य शूटरों के साथ महेंद्र गौतम की हत्या को अंजाम दिया था, और पूरा खेल 50 करोड़ की प्रॉपर्टी को लेकर था। बनारसी यादव के गाजीपुर के कुछ बड़े माफिया से सीधे संपर्क थे। इन्हीं संपर्कों के जरिए उसे हथियार, शरण और काम मिलता था। अब उसके संपर्कों, फाइनेंसरों और सपोर्ट सिस्टम को खंगाला जा रहा है।