यदि 10 फरवरी के बाद प्रतिबंध बढ़ाया गया तो फिर एक माह बाद पड़ने वाले होली त्योहार पर बनारसी वस्त्रों का आर्डर कैसे पूरा किया जाएगा। इस बात को लेकर बुनकरों सहित गद्दीदारों में उहापोह की स्थिति है। ऐसे में 40 हजार हथकरघा ठप होने के कगार पर पहुंच जाएंगे।
सिल्क ट्रेड एसोसिएशन के अध्यक्ष हर्षपाल कपूर ने बताया कि चीने ने कोरोना वायरस को देखते हुए दस फरवरी तक सिल्क के निर्यात पर रोक लगा दी है। इससे बनारसी साड़ी का कारोबार प्रभावित होना शुरू हो गया है। फरवरी माह में चीन में आयोजित सिल्क फेयर भी स्थगित कर दिया गया है। प्रतिबंध से आने वाले दिनों में रोजी-रोटी पर संकट तय है।
बनारस वस्त्र उद्योग का प्रति माह करीब 200 करोड़ का कारोबार है। जिले के करीब सात लाख लोग परोक्ष-अपरोक्ष रूप से बनारसी वस्त्र उद्योग से जुड़े हैं। कोरोना वायरस के चलते चीन से सिल्क आना बंद हो गया है। यदि इसकी जल्दी काट नहीं ढूंढी गई तो फिर साड़ी उद्योग का नुकसान तय है। एक माह बाद होली है। ऐसे में यह बड़ा संकट बनारसी वस्त्र उद्योग पर आने वाला है। - राजन बहल, महामंत्री- बनारसी साड़ी वस्त्र उद्योग एसोसिएशन
एक नजर
जिले में प्रतिमाह 200 करोड़ का है बनारसी साड़ी का कारोबार
बनारसी वस्त्र उद्योग से सात लाख लोगों की चलती है रोजी-रोटी
जिले में 40 हजार हथकरघा पर बनती है बनारसी साड़ी
एक लाख से अधिक जुड़े हैं बुनकर
चीन से हर माह 1500 टन आयात होता है सिल्क
चीन में आयोजित सिल्क फेयर निरस्त, बनारस के कारोबारी भी लेते हैं हिस्सा