इनके अलावा मिर्जापुर की बजरी, रामकेड़ा आम, सूरत डायमंड, पानीपत खेस टेक्सटाइल, त्रिपुरा चकमा वस्त्र, हिमाचल वुड कार्विंग, नागालैंड मौलम पाइनएप्पल, मिजोरम दारजो चाय, जयपुरी रजाई, मेघालय बांस क्राफ्ट आदि भी सूची में सम्मिलित किए गए हैं।
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उन्होंने बताया कि इस कार्य को संभव बनाने में नाबार्ड, वस्त्र मंत्रालय, एमएसएमई मंत्रालय, डोनर मंत्रालय और भारत सरकार के विभिन्न विभागों का सहयोग मिला। किसी एक संस्था द्वारा एक वर्ष में 75 जीआई आवेदन करना अपने आप में ऐतिहासिक है। काशी से दिया गया यह तोहफ़ा न केवल भारत की बौद्धिक संपदा और सांस्कृतिक धरोहर को कानूनी संरक्षण प्रदान करेगा, बल्कि इन उत्पादों को वैश्विक पहचान भी दिलाएगा।