बीएलएफ के अध्यक्ष दीपक मधोक ने स्वागत भाषण में कहा कि इस फेस्ट के लिए काशी से ज्यादा उपयुक्त स्थान कोई और हो ही नहीं सकता। यहां धर्म, आध्यात्म, संस्कृति, संस्कार, संस्कृत आदि का अविरल प्रवाह है। कहा कि बनारस लिटरेचर फेस्टिवल एक ऑर्गनाइज्ड टीम वर्क है। इस बार फेस्टिवल में 167 सेलिब्रिटीज आए हुए हैं। कई कार्यक्रम एक साथ संचालित हैं। उन्होंने सभागार में मौजूद सैकड़ों संस्कृति एवं कला प्रेमियों को कार्यक्रम का साक्षी बनने का आह्वान किया।
बीएलएफ के सचिव बृजेश सिंह ने इस फेस्टिवल के कॉन्सेप्ट को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि यह बनारस की निरंतर आनंदयुक्त संस्कृति की वाहक है। बाबा काशी विश्वनाथ और मां अन्नपूर्णा की असीम कृपा से यह फेस्टिवल चौथे वर्ष भी भव्य रूप से आयोजित हो रहा है। इसमें 13 देशों के परफॉर्मेंस और 50 से अधिक देशों के दर्शक आए हुए हैं। उन्होंने कहा कि अनुमानतः 1 फरवरी को महोत्सव के समापन तक लगभग एक लाख लोग इसके साक्षी बनेंगे।
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ज्योतिषाचार्य प्रोफेसर चंद्रमौली उपाध्याय ने कहा कि यह आयोजन सामान्य नहीं, बहुत कठिन है। इसे पूर्ण करने के लिए जो प्रयत्न किया जा रहा है, वह अतिमहत्वपूर्ण है। नेपाल से आए विशेष अतिथि विनोद चौधरी ने कहा कि नेपाल और काशी का संबंध अद्भुत और अटूट है। इतिहास ने इसको जोड़ा और वर्तमान ने इसे आगे बढ़ाया है। यह संबंध गॉड गिफ्टेड है, क्योंकि नेपाल में पशुपतिनाथ हैं और काशी में काशी विश्वनाथ हैं। इस अवसर को नित नवीनता के साथ आगे बढ़ाया जाए। साहित्यकार डॉ. नीरजा माधव ने कहा कि काशी के अधिपति बाबा काशी विश्वनाथ का स्वभाव जैसा है, वैसा ही उनके काशीवासियों का भी है।