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बनारस का सरकारी स्कूल: दाखिला लेने वाले बच्चों की संख्या हुई इतनी ज्यादा, अब दो शिफ्ट में चलेंगी कक्षाएं

Mon, 12 Oct 2020 03:30 PM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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कंपोजिट विद्यालय, केशरीपुर। - फोटो : अमर उजाला
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पिछले कई सालों से सरकारी स्कूलों की शिक्षण व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े होते आए हैं। छात्र संख्या शून्य होने से सरकारी स्कूलों को बंद भी करने पड़ा है। लेकिन सरकारी विद्यालयों की ये सूरत अब बदल रही है। काशी विद्यापीठ ब्लॉक का कंपोजिट विद्यालय केशरीपुर एक मिसाल बना है।

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इस स्कूल में इतने बच्चों का प्रवेश हो चुका है कि कोरोना काल के बाद स्कूल खुलते हैं तो यहां कान्वेंट की तर्ज पर बच्चों को दो शिफ्ट में बुलाना होगा। इसके लिए प्रधानाध्यापक ने बीएसए को पत्र भेजकर विद्यालय को दो शिफ्ट में चलाने की मंजूरी मांगने के साथ ही कक्षाओं का निर्माण कराने का सहयोग मांगा है।


कंपोजिट विद्यालय केशरीपुर में स्मार्ट क्लास के जरिए पढ़ाई कराई जाती है। विद्यार्थियों को कंप्यूटर शिक्षा का ज्ञान दिया जाता है। यही कारण है कि वर्तमान में इस विद्यालय में 520 विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। वर्तमान में विद्यालय में पढ़ने वाले 40 प्रतिशत बच्चे कान्वेंट स्कूलों के हैं। विद्यालय के प्राइमरी सेक्शन (एक से पांच) में 333 बच्चे हैं और वही सीनियर सेक्शन (छह से आठ) में 187 बच्चे पढ़ाई करते हैं। जिनके लिए 14 शिक्षक तैनात हैं।

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वाई फाई और स्मार्ट क्लास से लैस
यह विद्यालय जिले के उन चुनिंदा प्राइमरी स्कूलों में से है, जहां छात्रों को कंप्यूटर की शिक्षा भी दी जाती है। स्कूल की खास बात यह है कि इस स्कूल में शिक्षक मार्कर बोर्ड पर ही पढ़ाते हैं। स्कूल में वाई फाई के साथ ही स्मार्ट क्लास की भी व्यवस्था है। स्कूल में बने कक्षाओं में जाते ही आपको किसी अच्छे कान्वेंट स्कूल का अनुभव होने लगता है। इन कमरों को छात्रों की पढ़ाई के अनुरूप ही सजाया गया है।

सीसीटीवी कैमरे से लैस है स्कूल
स्कूल में सीसीटीवी कैमरे भी लगे हुए हैं। इन कैमरों की मदद से स्कूल की कक्षाओं को प्रधानाध्यापक अपने कमरे से मॉनिटर कर सकते हैं। राजेश बताते हैं कि बच्चों को समय पर किताबें नहीं मिलती थी ऐसे में पढ़ा पाना मुश्किल था। किताबें न मिलने के कारण बच्चों का पाठ्यक्रम समय से पूरा नहीं हो पाता था। इस समस्या से निजात पाने के लिए किताबों को स्कैन करके उन्हें सेव कर लिया।
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गुणवत्तापूर्ण मिड डे मील
सरकारी स्कूलों में मिलने वाले मिड डे मील खाने को लेकर लोगों की आम अवधारणा यही है कि यहां मिलने वाला खाना बेहद घटिया क्वालिटी का होता है। लेकिन राजेश ने अपने स्कूल में इस अवधारणा को बदल कर रख दिया है। स्कूल में मिलने वाले खाने की गुणवत्ता बेहद अच्छी है। जिससे छात्रों को मिड डे मील खाने से कभी परहेज नहीं होता है।

लाइब्रेरी और प्रयोगशाला भी है
विद्यालय की खुद की लाइब्रेरी है, जिसमें अध्यापकों और बच्चों के लिए हजारों किताबें रखी हैं। हर दिन बच्चों के लिए लाइब्रेरी की अलग क्लास होती है। जिसमें करंट अफेयर्स, इनसाइक्लोपीडिया, छोटे बच्चों के लिए पिक्चर डिक्शनरी, विज्ञान, गणित व कहानियों की अनेक किताबें मौजूद हैं।  इसके साथ ही बच्चों के लिए प्रयोगशाला भी बनाई गई है।

बेसिक शिक्षा अधिकारी राकेश सिंह ने बताया कि विद्यालय के प्रधानाध्यापक व शिक्षकों ने अपनी मेहनत से विद्यालय को एक आदर्श विद्यालय का दर्जा दिला दिया है। लगातार बढ़ती बच्चों की संख्या की वजह से स्कूल का परिसर छोटा पड़ने लगा है। इसको देखते हुए प्रधानाध्यापक ने विद्यालय को दो शिफ्ट में चलाने की मांग की है।
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