गंगा में बढ़ते जलस्तर के कारण तटीय इलाकों में दुश्वारियां बढ़ गई हैं। बनारस के 84 घाटों का आपसी संपर्क समाप्त हो चुका है। मणिकर्णिका घाट पर शवदाह स्थल को बदलना पड़ा और हरिश्चंद्र घाट पर ऊपर शवदाह शुरू हो गया है। वहीं, दशाश्वमेध घाटपर तीसरी बाद आरती स्थल बदला गया। उधर, ग्रामीण इलाकों में खेतों में बाढ़ का पानी घुसने के कारण सब्जी की फसल नष्ट हो गई है। पिछले साल 12 जुलाई के बाद से गंगा के जलस्तर में बढ़ाव शुरू हुआ था।
केंद्रीय जल आयोग की बाढ़ बुलेटिन के अनुसार बृहस्पतिवार की रात नौ बजे गंगा का जलस्तर 65.42 मीटर दर्ज किया गया। गंगा के जलस्तर में तीन सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ोतरी हो रही है। बनारस के घाटों का आपसी संपर्क समाप्त होने के कारण अब गलियों से आवागमन हो रहा है।
सुबह आठ बजे गंगा का जलस्तर 65.04 मीटर था और जलस्तर में चार सेंटीमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से बढ़ोतरी हो रही थी। शाम को पांच बजे के बाद गंगा की रफ्तार में एक सेंटीमीटर की कमी दर्ज की गई और जलस्तर तीन सेंटीमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से बढ़ोतरी होने लगी। घाटों के किनारे नाविकों ने चौकसी बरतनी शुरू कर दी है। गंगा आरती अब ऊपर होने लगी है।
चौबेपुर में गंगा का जल स्तर बढ़ने से गंगा के किनारे परनापुर, मुरीदपुर ,गौरा उपरवार, बर्थरा कलां, सरसौल सिरिस्ती समेत कई गांवों के किसानों की गंगा के तटवर्ती इलाकों में बोई गई साग सब्जी की खेती चौपट हो गई है। बरसात की शुरुआत के साथ ही गंगा नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने लगा है, जिससे चिरईगांव क्षेत्र के ढाब इलाके में बाढ़ का पानी भर गया है।