लोकशांति और कानून व्यवस्था के मद्देनजर पुलिस यदि अब किसी को पाबंद करेगी या फिर शांतिभंग के आरोप में चालान करेगी, तो उसे अपनी चालानी रिपोर्ट में तथ्य के साथ कारण भी स्पष्ट करना होगा। उच्च न्यायालय इलाहाबाद के आदेश के बाद प्रदेश के सभी जिलों के एसपी/एसएसपी और रेंज के डीआईजी/आईजी के लिए यह निर्देश प्रदेश डीजीपी एचसी अवस्थी ने जारी किया है।
दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 107 और 116 का इस्तेमाल लोकशांति और कानून व्यवस्था का उल्लंघन होने की आशंका के आधार पर पुलिस किसी को पाबंद करने के लिए करती है। वहीं, दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 151 के तहत शांतिभंग का उल्लंघन करने के आरोप में पुलिस चालान करती है। इन दोनों कार्रवाई के लिए पुलिस वर्षों पुराने प्रिंटेड प्रोफार्मा में चालानी रिपोर्ट भेजती है। प्रिंटेड प्रोफार्मा में पाबंद किए जाने या शांतिभंग में चालान किए जाने संबंधी पूरा विवरण और कारण नहीं स्पष्ट हो पाता है। इस वजह से निरोधात्मक कार्रवाई की चालानी रिपोर्ट प्रिंटेड प्रोफार्मा में भेजने पर रोक लगाते हुए प्रकरण में विवाद से संबंधित कारण का उल्लेख करने के लिए कहा गया है।
डीजीपी ने जारी किए हैं ये निर्देश
प्रत्येक प्रकरण में विवाद से संबंधित स्पष्ट और तथ्यात्मक कारण दर्ज किया जाए।
प्रत्येक चालानी रिपोर्ट के साथ प्रकरण से संबंधित प्रार्थना पत्र या एनसीआर की प्रति जरूर संलग्न की जाए।
दरोगा जो भी चालानी रिपोर्ट तैयार करें, उसे थानाध्यक्ष देखें और अपनी टिप्पणी कर आगे की कार्रवाई के लिए भेजें।