भारतीय जनता पार्टी ने चुनाव से पहले कश्मीर से धारा 370 हटाने, अयोध्या में राम मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को क्रियान्वित कराने, नागरिकता संशोधन बिल को लेकर वादा किया था। इसी के आधार पर पार्टी को देश की जनता ने सरकार बनाने के लिए बहुमत दिया। अब इसे लागू करके हमने चुनावी घोषणा पत्र पर लोगों का भरोसा बढ़ाने की परंपरा की नींव डाली है।
हमने यह बताने का प्रयास किया है कि भाजपा जो कहती है वही करती है। कांग्रेस, सपा, बसपा, टीएमसी, वामदलों के लिए चुनावी घोषणा पत्र महज एक लफ्फाजी होता है, जिसे वे चुनाव के बाद भूल जाते हैं। अब उस पर हमने विराम लगा दिया है। यह हमारी भरोसे की राजनीति की परंपरा है।
उन्होंने कहा कि देश के बंटवारे के समय 23 प्रतिशत हिंदू पश्चिमी पाकिस्तान में, 28 प्रतिशत हिंदू पूर्वी पाकिस्तान (अब के बंगला देश) में थे। नौ प्रतिशत मुसलमान हिंदुस्तान में रह गए थे। आज पाकिस्तान में हिंदुओं की आबादी एक प्रतिशत व पूर्वी पाकिस्तान में डेढ़ प्रतिशत रह गई है। हमारे देश में मुसलमानों की संख्या बढ़कर 23 प्रतिशत हो गई है। ऐसा क्यों हुआ, इस पर नागरिकता संशोधन बिल का विरोध करने वाले दलों को जवाब देना होगा, वरना इस देश की जनता उन्हें माफ नहीं करेगी।
उन्होंने कहा कि जो हिंदू प्रताड़ित होकर भारत में शरण लेने के लिए आते हैं। उनमें 85 प्रतिशत दलित वर्ग से आते हैं। ऐसे में नागरिक संशोधन बिल के विरोध का मतलब ये विरोधी दल दलित विरोधी भी हैं। देश की जनता इनकी असलियत जान चुकी है, इनके चिखने-चिल्लाने व विरोध करने से अब कोई अंतर पड़ने वाला नहीं है।