हालांकि डीएम के ट्विटर पर माफी मांगने के बाद अब बड़ी संख्या में लोग डीएम के पक्ष में भी अपना कमेंट कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि डीएम ने सही किया और स्कूल पर राजनीति करने पहुंचे बसपा नेताओं को यही जवाब दिया जाना चाहिए था।
कुछ लोगों ने यह भी कहा कि मामले की जांच के पहले ही इसे जातिगत रूप देने का प्रयास किया गया जो गलत था। बसपा नेताओं पर तंज कसने वालों की कमी नहीं थी। कई लोगों ने डीएम के ट्वीट को रीट्वीट कर लिखा कि यदि कहीं सच में भेदभाव हो रहा है तो वह गलत है। लेकिन इससे पहले मामले की जांच पूरी हो जाने देना चाहिए था।
कुछ लोगों की ट्विट :
मनीष तिवारी ने लिखा कि मेरे हिसाब से आपने जो किया सही था लेकिन आपके द्वारा इतनी विनम्रता से माफी मागना भी बहुत अच्छा लगा। इसके साथ ही जिस व्यक्ति को आपकी बात से ठेस पहुंची हो, उनको भी उदारता के साथ पद की गरिमा का ख्याल रखते हुए माफ कर देना चाहिए।
शिवदास गुप्ता ने अपने ट्विटर पर ट्वीट करते हुए लिखा कि सर! आपको माफ़ी नहीं मांगनी चाहिए क्योंकि आपके पद की गरिमा कुछ और है। वो नेता जो बिना पढ़े लिखे हैं, उनसे माफ़ी मांगी आपने। बहुत बुरा लग रहा है। हमें आपके ऊपर गर्व है। जय हिंद जय भारत।
दीपक दिवाकर लिखते हैं कि जिलाधिकारी महोदय प्रणाम, आपकी भावनाओं का सम्मान है पर जिस तरीके से आपने उस दिन व्यवहार किया, वह कोई सामान्य घटना नहीं थी। आपने अपनी अपरिपक्वता का परिचय दिया।
वरुण सिंह ने लिखा कि आपकी बात कहीं से गलत नहीं थी। फिर भी आपका माफी मांगना आपका बड़प्पन है। एक सम्मानित पद की इज्जत होनी ही चाहिए। तो वहीं रजनीश लिखते हैं कि सर! आप ने कुछ गलत नहीं बोला। ये नेता खुद जाति के नाम पर राजनीति कर रहे हैं। आपने उसको हकीकत बोली है। सच बोलना कोई पर्सनल कंमेट नहीं होता है।
क्या कहते हैं बसपा नेता ?
उधर, बसपा जिला अध्यक्ष संतोष राम ने कहा कि डीएम ने भले ही माफी मांग ली हो पर क्या वह अपने मनुवादी विचारधारा से बाहर आ सके हैं। माफी उनकी तब मानी जाएगी, जब वह सभी के लिए एक समान दृष्टिकोण से सोचें और बात करें।
जिलाधिकारी का बयान :
डीएम भवानी सिंह खंगारौत ने कहा कि इस पूरे मामले को इस तरह उठाया गया जैसे मैं किसी जाति या वर्ग के खिलाफ हूं। मैंने माफी इस लिए मांगी कि इस मामले को एक पूरे वर्ग ने अपनी अस्मिता का प्रश्न बना लिया। उनकी भावनाओं का ख्याल रखते हुए एक जिम्मेदार व्यक्ति के रूप में मैने माफी मांग ली। मुझे दुख है कि कुछ लोग आपस की बातों को पूरे वर्ग से जोड़ देते हैं और लोग इससे आहत हो जाते हैं। हमें अपनी सोच को बदलना होगा।
हाथ पकड़कर पूछी थी घड़ी की कीमत :
डीएम ने बसपा नेता डॉ मदन राम के जूते दिखाते हुए उसकी कीमत और हाथ पकड़कर घड़ी की कीमत पूछी थी। इसके बाद बसपा नेता के कंधे पर हाथ रखकर स्कूल के अंदर जाकर साथ में सत्यता का पता लगाने का अनुरोध किया था।
बसपा नेता इस पर तैयार नहीं हुए तो डीएम ने पूछा था, आपका काम सिर्फ तमाशा करना है? बसपा नेता ने इसे अपने साथ दुर्व्यवहार बताते हुए एक दलित का अपमान कहा। डीएम और बसपा नेता का यह वीडियो वायरल हुआ तो दलित संगठन भी मुखर हो गए। डीएम के इस व्यवहार के बाद से सोशल मीडिया पर यह प्रकरण लगातार सुर्खियों में रहा। कई लोग डीएम को जूतों और गाड़ियों के साथ अपनी तस्वीर भेज रहे थे।