नौकरी दिलाने का झांसा देकर नेपाली युवतियों से रुपये ऐंठने और उनको बंधक बनाकर देह व्यापार कराने के मामले में वाराणसी फास्ट ट्रैक कोर्ट के न्यायाधीश सर्वेश कुमार पांडेय ने बुधवार को आरोपी शिवपुर क्षेत्र निवासी जय सिंह की जमानत अर्जी खारिज कर दी। जमानत का विरोध एडीजीसी ने किया।
आरोप है कि नेपाल के रहने वाले एक व्यक्ति ने 23 जुलाई 2018 को शिवपुर थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी कि संदीप सिंह ने नौकरी दिलाने का लालच देकर जून 2018 में उसकी पत्नी को बनारस लाकर जय सिंह के घर में रखा। वहां उसकी जैसी और भी नेपाली युवतियां थीं।
उसकी पत्नी से उन लोगों ने उससे दो लाख रुपया और उसका नेपाल का पासपोर्ट ले लिया। मांगने पर कहते थे कि उसका पासपोर्ट दिल्ली में पवन के पास है। जय सिंह और संदीप उसकी पत्नी को बेचने जा रहे थे कि किसी तरह भागकर वो अपनी जान बचाई। शिवपुर पुलिस ने इस प्रकरण में जय सिंह को गिरफ्तार किया था।
डकैती के आरोप से पांच बरी
अपर सत्र न्यायाधीश पंद्रह रामबिलास सिंह की अदालत ने डकैती के आरोपी विकास उर्फ नत्थू उर्फ गुड्डू यादव, घनश्याम उर्फ मुन्ना, अनिल पटेल, राजपति यादव और बृजेश पटेल का आरोप सिद्ध न होने पर संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। अदालत में बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता उपेंद्र राणा यादव व बीर बहादुर सिंह ने पक्ष रखा।
अभियोजन के अनुसार सुलेमापुर महुवरिया गांव निवासी वादी प्यारेलाल ने चोलापुर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। आरोप था कि उसका पुत्र सुरेश यादव 10 अप्रैल 2008 को अपनी कंपनी के तगादे का पैसा लेकर गांव निवासी हरिहर मास्टर के यहां शादी में शामिल होने गया था।
रात 11 बजे वह वापस लौटने के लिए अपनी गाड़ी लेने जा रहा था। आरोप है कि इसी दौरान गांव के विकास, घनश्याम, अनिल, राजपति और बृजेश के साथ चार-पांच अज्ञात लोग उसे घेर लिए और उसके जेब में रखा 25 हजार रुपया छीन लिए। विरोध करने पर सुरेश को मारापीटा गया।
फायरिंग के आरोपी की जमानत मंजूर
अपर सत्र न्यायाधीश तृतीय प्रदीप कुमार सिंह की अदालत ने पुलिस पार्टी पर फायरिंग व आर्म्स एक्ट के आरोपी आशापुर निवासी मो. आरिफ उर्फ शालू की जमानत मंजूर कर ली। अभियोजन का आरोप है कि अभियुक्त मो. आरिफ उर्फ शालू बीते 18 जुलाई को सारनाथ थाना क्षेत्र में कैलाश यादव नामक व्यक्ति पर हुए जानलेवा हमले में आरोपी था। मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने उसे लेढूपुर के समीप स्थित एक स्कूल के पास से गिरफ्तार किया था। इस दौरान उसने पुलिस पार्टी पर फायरिंग भी की थी। अदालत में बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता उपेंद्र राणा यादव व बीर बहादुर सिंह ने पक्ष रखा।