फर्जी दस्तावेजों से असलहा लाइसेंस बनवाने का था मास्टरमाइंड
मेराज अहमद को फर्जी दस्तावेजों पर असलहों का लाइसेंस बनवाने का मास्टरमाइंड माना जाता था। अक्टूबर 2020 में जैतपुरा पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया था। छानबीन में फर्जी तरीके से बनवाए गए नौ लाइसेंसी पिस्टल और रायफल की जानकारी हुई थी। साल 2015 में मुन्ना बजरंगी के खास तारिक की लखनऊ में गोली मारकर हत्या की गई। तारिक के घर से पुलिस को लाइसेंस रायफल बरामद हुई, जो बाद में फर्जी पाई गई। बताया जा रहा है कि इस रायफल का लाइसेंस भी मेराज ने ही नागालैंड से बनवाया था। फर्जी पते पर असलहा लाइसेंस जारी होने के आरोप में जेल जाने के बाद विकास प्राधिकरण ने उसके अवैध निर्माण को ढहाया था।
अनिल राय हत्याकांड में मेराज को बनाया था आरोपी
मुन्ना बजरंगी के करीबियों में शुमार रहे मेराज का नाम मलदहिया पर काशी विद्यापीठ के छात्रनेता रहे अनिल राय हत्याकांड में भी आया था। मेराज को साजिश का हिस्सा माना गया था और मुन्ना बजंरगी ने वर्ष 2002 में भाजपा नेता अनिल राय की हत्या की थी। इससे पहले 1997 में अनिल के बड़े भाई सुनील राय और राम प्रकाश पांडेय की भी हत्या मुन्ना बजरंगी ने की थी।
मेराज के कहने पर विहिप नेता का अपहरण और हत्या
पूर्वांचल में तैनात रहे एक पूर्व आईपीएस ने बताया कि अवैध कोयला कारोबार संभालने के बाद मेराज पूरे धंधे पर मुख्तार अंसारी का कब्जा जमाने में जुट गया था। उसने विहिप नेता नंद किशोर रूंगटा को अपने धंधे का सबसे बड़ा अवरोध बताया। 1997 में विहिप के तत्कालीन कोषाध्यक्ष और कोयला कारोबारी से रंगदारी मांगी गई थी। मना करने पर मुख्तार के गुर्गों ने रूंगटा का अपहरण किया और फिरौती की रकम लेने के बाद हत्या कर दी थी। बताया जाता है कि उसने रूंगटा को कोयला कारोबार छोड़ने को भी कहा था। नहीं मानने पर उनकी हत्या की। हालांकि मुख्तार गैंग के सदस्य रहे इनामी अताउर्रमान उर्फ बाबू और शहाबुद्दीन को इसका आरोपी बनाया था। सीबीआई में जांच के बाद दोनों का अब तक कोई पता नहीं चल पाया।